
Mamata Banerjee has the pulse of Home Minister Amit Shah.
Mamata Banerjee has the pulse of Home Minister Amit Shah.अगर ममता बनर्जी ने मुंह खोल दिया… तो क्या सचमुच पूरा देश हिल जाएगा? या ये सिर्फ राजनीति की एक धमकी है ?
क्या ED की रेड ने बंगाल की राजनीति को हिला दिया है या ये सब एक पुराने स्क्रिप्ट की नई एंट्री है?
बड़ा सवाल यह है कि जब भी केंद्र की एजेंसियां पश्चिम बंगाल में पहुंचती हैं, तो सियासत क्यों भड़क जाती है?
क्या भ्रष्टाचार के आरोपों से बचाव का राजनीतिक चोगा ओढ़ लिया गया है, या वाकई केंद्र सरकार विपक्ष को कुचलने की कोशिश कर रही है? पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त उबल रहे पानी जैसी है ED ने I-PAC के दफ्तर पर छापेमारी की, और पूरा राज्य सड़कों पर उतर आया।
पार्टी का डेटा और रणनीति चुराने की कोशिश
TMC का दावा है कि ED ने पार्टी का डेटा और रणनीति चुराने की कोशिश की। ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया — “अगर मैंने मुंह खोल दिया ना… तो पूरा देश हिल जाएगा!” उनके निशाने पर सीधे गृह मंत्री अमित शाह थे। ममता ने कहा, “मेरे पास अमित शाह के खिलाफ पेन ड्राइव है।” अब सोचिए, एक मुख्यमंत्री खुले मंच से देश के गृह मंत्री के खिलाफ ऐसा बयान देती है और पूरा माहौल लगातार तूफानी बना हुआ है। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी वही स्क्रिप्ट बंगाल में चलाना चाहती है जो हरियाणा और बिहार में चली थी— यानी सत्ता हथियाने की कोशिश। उन्होंने कहा कि केंद्र की BJP सरकार, एजेंसियों का इस्तेमाल करके जिन राज्यों में विपक्षी पार्टियों का शासन है वहां “लोकतांत्रिक तख्तापलट” की कोशिश कर रही है।
एजेंसी की कार्रवाई है या राजनीतिक एजेंडा?
अब सवाल यह है — क्या यह एजेंसी की कार्रवाई है या राजनीतिक एजेंडा? और अगर ममता के पास सचमुच ऐसे सबूत हैं जिनसे “पूरा देश हिल सकता है,” तो आखिर वो सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे? आप बताइए — क्या ये सबूत सच में हैं या सिर्फ राजनीतिक धमकी? क्योंकि इस खेल का दांव सीधा 2026 के चुनाव तक जाता दिख रहा है। कोलकाता में रैली के दौरान ममता ने भीड़ से कहा — “अगर किसी ने मुझे दुख पहुंचाया, तो मैं उसे छोड़ती नहीं।”
जनप्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून नहीं, घमंड
उन्होंने कहा कि SIR (Special Investigation Report) के नाम पर बंगाल में लोगों को परेशान किया जा रहा है — बुजुर्गों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक… और यहां तक कहा कि जो बंगाली बोलता है, उसे बांग्लादेशी घोषित कर दिया जाता है! अब यहाँ सवाल उठता है — क्या बीजेपी “राष्ट्रीय सुरक्षा” के बहाने बंगाली पहचान को टारगेट कर रही है, जैसा ममता आरोप लगा रही हैं, या ये सिर्फ राजनीतिक भावनाओं को भड़काने की रणनीति है? दूसरी तरफ, दिल्ली में जब TMC सांसद गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। ममता ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और लिखा — “चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून नहीं, घमंड है।”
CM और जांच एजेंसी कानूनी रूप से आमने-सामने
अब जरा सोचिए — क्या विरोध करने का हक सिर्फ सत्ताधारी के खिलाफ ही बचा है, या एजेंसियों की कार्रवाई का विरोध भी अब “गुनाह” मान लिया गया है? ममता ने ED के खिलाफ दो एफआईआर (FIR) दर्ज कराईं हैं — और दावा किया है कि ED की टीम ने उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वो खुद छापेमारी के दौरान मौके पर मौजूद थीं, और इसमें कुछ भी “गैरकानूनी” नहीं था। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। ED ने पलटवार करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका दायर कर दी — जिसमें खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर तक शामिल हैं! सोचिए — एक मुख्यमंत्री और एक जांच एजेंसी अब कानूनी रूप से आमने-सामने हैं… यानी अब यह लड़ाई सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि संविधान की व्याख्या की बन गई है।
कोयला घोटाले का पैसा अमित शाह को गया
अब बात करते हैं राजनीति के अर्थशास्त्र की। ममता बोलती हैं — “कोयला घोटाले का पैसा सुवेंदु अधिकारी ने इस्तेमाल किया और अमित शाह को भेजा।” यह आरोप अगर सच है, तो यह सिर्फ बंगाल की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की नींव हिला सकता है। लेकिन सवाल यह भी तो है — क्या ममता अब उन सबूतों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं? टीएमसी की सोशल मीडिया टीम ने लिखा — “ शुक्रवार को बंगाल में सड़कों पर असली गर्जन की गूंज सुनाई। एजेंसी की धमकी और केंद्र की साजिश अब बंगाल को नहीं डरा सकती।”
TMC अब टकराव मोड में
यानी संदेश साफ है — बंगाल अब टकराव के मोड में खुलकर उतर आया है। क्या ये सिर्फ एजेंसी बनाम विपक्ष की लड़ाई है, या लोकतंत्र बनाम डर की जंग शुरू हो चुकी है? क्यों हर उस राज्य में जहां विपक्षी पार्टियां सत्ता में हैं वहां चुनाव से ठीक पहले छापे पड़ने शुरू हो जाते हैं । और फिर सवाल ये भी तो है — अगर ED और CBI सच में “एक्सटॉर्शन डायरेक्टरेट” बन गई हैं, जैसा टीएमसी आरोप लगाती है, तो क्या ये एजेंसियां अब जनता के लिए हैं या सत्ता के लिए?
बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
- हिमंत बिस्व सरमा ने कहा — “एक मुख्यमंत्री होते हुए फाइलें ले जाना शर्मनाक है।”
- मुख्तार अब्बास नक़वी बोले — “बंगाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की प्रयोगशाला बन गया है।”
यानी BJP पूरे मामले को “राष्ट्रीय सुरक्षा” और “भ्रष्टाचार सफाई” का मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रही है। ममता बनर्जी के तेवरों से यह भी साफ दिखता है कि अब वह डिफेंस मोड में नहीं, बल्कि अटैक मोड में हैं। उन्होंने कहा, “यदि तुम हमला करोगे तो मैं पलटवार करूंगी। मुझे पलटवार करना आता है।” यानी आने वाले दिनों में न सिर्फ बंगाल, बल्कि दिल्ली की सियासत में भी ममता का यह हमला गूंजने वाला है।
ममता हिलाएगी दिल्ली सियासत की बुनियाद
अब एक आखिरी बड़ा सवाल अगर वाकई ममता बनर्जी के पास “पेन ड्राइव” में वो सच है, जो इस देश को हिला सकता है… तो क्या लोकतंत्र के नाम पर उस सच को सामने लाने का समय नहीं आ गया? या फिर वो पेन ड्राइव भी चुनावी मौसम में खोली जाने वाली राजनीतिक गुटका है जो सिर्फ डराने के लिए दिखाई जाती है? क्या ममता बनर्जी के पास सचमुच ऐसे सबूत हैं जो दिल्ली की सियासत की बुनियाद हिला सकते हैं? क्योंकि आने वाले हफ्तों में बंगाल से निकलने वाली खबरें, दिल्ली की दीवारों तक को हिलाने वाली हैं।









