
Senior Congress leader Shivraj Patil passes away, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 12 दिसंबर 2025 की सुबह महाराष्ट्र के लातूर स्थित अपने घर ‘देवघर’ में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया । श्री पाटिस लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज घर पर ही चल रहा था । उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय नेताओं और राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा दुख जताया है और उन्हें एक अनुभवी, समर्पित और लोकसेवक नेता के रूप में याद किया जा रहा है ।
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक शुरुआत
शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के छोटे से गाँव चाकुर में हुआ था । उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और जल्द ही स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गए । उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत लातूर नगरपालिका से की जहां वे अध्यक्ष रहे । इसके बाद उन्होंने 1970 में महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव जीता और दो बार विधायक रहे, साथ ही विधानसभा में उपाध्यक्ष और स्पीकर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे ।
लातूर लोकसभा सीट लगातार 7 बार की जीत हासिल
1980 में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण किया। पाटिल ने पहली बार 7वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में जीत हासिल की । इसके बाद उन्होंने लगातार सात बार लातूर लोकसभा सीट जीती। उनकी यह निरंतर जीत उनके इलाके में मजबूत जनाधार और पार्टी में विश्वसनीयता को दर्शाती थी। लोकसभा में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में काम किया और विभिन्न विभागों के मंत्रालयों में भी राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ संभालीं — जिनमें रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और विमानन जैसे क्षेत्र शामिल थे।
लोकसभा स्पीकर और केंद्रीय मंत्री
शिवराज पाटिल की राजनीतिक करियर ने तब और गति पकड़ी जब 1991 से 1996 तक वे 10वें Lok Sabha के स्पीकर रहे । इस पद पर रहते हुए उन्होंने सदन के संचालन और संसदीय प्रक्रिया को सम्मानजनक रूप से संभाला, जिसके लिए उन्हें सदन में सम्मान मिला। बाद में, 2004 में, वे भारत के केंद्रीय गृह मंत्री नियुक्त हुए — एक जिम्मेदारी जो उन्होंने UPA सरकार के दौरान 2008 तक निभाई। गृह मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल देश की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से भरा रहा।
26/11 मुंबई आतंकी हमला और इस्तीफा
उनके गृह मंत्री पद का सबसे चुनौतीपूर्ण मोड़ 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान आया, जब मुंबई पर आतंकी हमला हुआ इसके बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिवराज पाटिल ने 30 नवंबर 2008 को गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया हैं।
विवाद और आलोचनाएं
शिवराज पाटिल का करियर केवल प्रशंसाओं से ही नहीं भरा रहा कुछ मौकों पर उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा । बता दें कि दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट के तुरंत बाद एक सार्वजनिक घटना में वे बार-बार पोशाक बदलते हुए देखे गए, जिससे उनकी गंभीरता पर सवलिया निशान लगा दिया । इस घटना के बाद उन्हें विधानसभा में और सार्वजनिक मंचों पर आलोचना का सामना करना पड़ा ।
केंद्रीय राजनीति में सक्रिय सेवा के बाद, पाटिल ने 2010 से 2015 तक पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में भी सेवा दी। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक मामलों में योगदान किया और संसद में उत्कृष्ट कार्य के लिए Outstanding Parliamentarian Award जैसी पहलों को भी बढ़ावा दिया।
परिवार और निजी जीवन
शिवराज पाटिल के निधन के समय उनके परिवार में उनका बेटा शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोती-पोते शामिल हैं। उनकी बहू राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़ी हुईं रहीं, जो उनकी राजनीतिक दुनिया में विविधता को दर्शाता है। शिवराज पाटिल को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने लगभग पाँच दशक तक सार्वजनिक सेवा में जीवन बिताया, जिसमें उन्होंने संसद के सर्वोच्च पदों का संचालन किया, सुरक्षा, प्रशासन और राजनीति के जटिल मुद्दों से निपटा, और अपने क्षेत्र लातूर के लिए लगातार प्रतिनिधित्व किया। न केवल उनके समर्थक बल्कि विरोधी भी उन्हें अनुभवी, गंभीर और संविधान-प्रेमी नेता के रूप में देखते हैं।









