
UGC की नई गाइडलाइंस को लेकर देशभर में विरोध तेज। स्वामी रामभद्राचार्य ने कानून वापस लेने की मांग की, वहीं लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के बैनर तले बड़ा प्रदर्शन हुआ
UGC की नई गाइडलाइंस पर बढ़ा विवाद
देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बस्ती में आयोजित रामकथा कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार को यह कानून हर हाल में वापस लेना होगा। उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव पैदा करने वाले ऐसे नियमों की कोई आवश्यकता नहीं है और जब तक वे धर्माचार्य हैं, तब तक इस कानून को लागू नहीं होने देंगे।
रामभद्राचार्य की चेतावनी-कानून वापस लें सरकार
अपने बेबाक बयानों के लिए प्रसिद्ध स्वामी रामभद्राचार्य ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाना है तो इस विवादित कानून को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि UGC के नए नियमों की आवश्यकता क्या थी और समाज में विभाजन पैदा करने वाली नीतियां क्यों लागू की जा रही हैं।
लखनऊ में सवर्ण मोर्चा का बड़ा प्रदर्शन
UGC के नए नियमों के विरोध में शनिवार को राजधानी लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। परिवर्तन चौराहे से गांधी प्रतिमा तक प्रदर्शनकारियों की भीड़ देखी गई। कई अन्य संगठनों ने भी इस विरोध में हिस्सा लिया।
पूर्व SDM अलंकार अग्निहोत्री भी शामिल
हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। हालांकि उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की, लेकिन हाथ में तख्ती लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार के खिलाफ नारे लगाते नजर आए।
ब्राह्मण समाज और जातिवाद पर भी बोले रामभद्राचार्य
रामकथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज और जातिवाद के मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज मूल रूप से जातिवादी नहीं रहा है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से इनकार न किया होता तो महाभारत का युद्ध टल सकता था। साथ ही उन्होंने गुरु वशिष्ठ का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने समाज के सभी वर्गों को समान सम्मान दिया।
सामाजिक कुरीतियों पर भी जताई चिंता
स्वामी रामभद्राचार्य ने समाज में व्याप्त छुआछूत और कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि भगवान राम सबके हैं और समाज में भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बस्ती जिले का नाम बदलकर “वशिष्ठ नगर” करने की मांग भी दोहराई और ब्राह्मण समाज में मांस व मदिरा सेवन जैसी प्रवृत्तियों पर चिंता जताते हुए जागरूकता की अपील की।
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