
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के तेल, गैस और प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने की कोशिश कर रहा है। खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, “ईरान के पास कई आकर्षक संसाधन हैं—तेल, गैस, खनिज संपदा और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति। अमेरिका एक बार फिर ईरान पर नियंत्रण करना चाहता है, जैसा उसने पहले किया था।”
“30 साल तक ईरान पर अमेरिका का कब्ज़ा रहा” – खामेनेई
खामेनेई ने अपने पोस्ट में दावा किया कि तीन दशकों से ज्यादा समय तक अमेरिका का ईरान की राजनीति, सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों पर प्रभाव रहा। उन्होंने कहा, “ईरान के तेल, राजनीति और सुरक्षा पर अमेरिका का कंट्रोल था। अब जब उनकी पकड़ कमजोर हुई है, तो वे दोबारा लौटने का रास्ता तलाश रहे हैं। लेकिन ईरानी कौम मजबूती से खड़ी है और ऐसा नहीं होने देगी।”
ईरान ने अमेरिका को चेताया
ईरान के सुप्रीम लीडर का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी हमले की आशंका बनी हुई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के अधिकारी अमेरिका से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन खामेनेई के बयान साफ संकेत देते हैं कि ईरान किसी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। इससे पहले भी खामेनेई अमेरिका को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान पर हमला हुआ, तो उसका नतीजा पूरे क्षेत्र में युद्ध के रूप में सामने आएगा।
इस बार युद्ध ईरान तक सीमित नहीं रहेगा
करीब 37 सालों से ईरान की सत्ता संभाल रहे 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “अगर अमेरिका इस बार युद्ध शुरू करता है, तो यह केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक क्षेत्रीय युद्ध होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान मजबूती से खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा। “अगर अल्लाह ने चाहा, तो अमेरिका की शरारतों और ज़ुल्म का अंत होगा।”
खुमैनी की वापसी की सालगिरह पर दिया बयान
खामेनेई ने यह भाषण 1979 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की फ्रांस से ईरान वापसी की सालगिरह के मौके पर दिया।
ईरानी क्रांति के दौरान तत्कालीन शासक मोहम्मद रजा शाह पहलवी को देश छोड़कर भागना पड़ा था, जिसके बाद खुमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक शासन स्थापित हुआ।
सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बताया “बगावत”
खामेनेई ने हाल के सरकार विरोधी प्रदर्शनों को “तख्तापलट जैसा प्रयास” करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों, बैंकों और मस्जिदों को निशाना बनाया। उन्होंने इन हिंसक घटनाओं को एक और “बगावत” बताया—यह शब्द वह पहले 2009 के ग्रीन मूवमेंट के लिए भी इस्तेमाल कर चुके हैं।
इस्तांबुल में ईरान समर्थक रैली
इस बीच तुर्की के इस्तांबुल में ईरान समर्थक प्रदर्शन देखने को मिले, जहां अमेरिका के खिलाफ नारेबाज़ी की गई और ईरान के समर्थन में रैली निकाली गई।
ईरान में महंगाई विरोधी आंदोलन और मौतों के आंकड़े
ईरान में 28 दिसंबर से महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन जल्द ही सत्ता विरोधी आंदोलन में बदल गया।संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और विदेश में रह रहे ईरानी विपक्षियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों को मार डाला। संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रैपोर्टेयर के अनुसार मौतों का आंकड़ा 20,000 से ज्यादा हो सकता है अमेरिका में रह रहे एक्टिविस्ट्स का दावा है कि 6,713 लोगों की मौत हो चुकी है । 17,000 से अधिक मामलों की जांच अभी जारी है। कुछ अन्य स्रोत इससे भी अधिक संख्या बताते हैं
ट्रंप की प्रतिक्रिया
खामेनेई के बयान के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान किसी समझौते पर सहमत होगा, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि अमेरिका-ईरान तनाव और गहराता जा रहा है।










