
हरियाणा, बिहार और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार सुबह 9 बजे से मतदान जारी है। इन तीनों राज्यों में राजनीतिक समीकरण काफी लचस्प बने हुए हैं और कई जगह क्रॉस वोटिंग का डर भी बना हुआ है।
बिहार में कांग्रेस के दो विधायक सुरेंद्र कुशवाह और मनोज विश्वास अभी तक वोट डालने नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों का फोन भी बंद आ रहा है। वहीं आरजेडी को भी अपने एक विधायक का इंतजार है, जो अभी तक मतदान के लिए नहीं पहुंचे हैं।
अब तक मिली जानकारी के अनुसार NDA के करीब 200 विधायक वोट डाल चुके हैं, जबकि महागठबंधन के 37 विधायक मतदान कर चुके हैं।
हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले अपना वोट डाला। सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक करीब 40 विधायक मतदान कर चुके थे। कांग्रेस के विधायक हिमाचल के कसौली से चंडीगढ़ पहुंचे और पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर इकट्ठा हुए, इसके बाद सभी विधायक बस से एक साथ विधानसभा पहुंचे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपना वोट डाल दिया है। खास बात यह है कि नीतीश कुमार खुद भी राज्यसभा के उम्मीदवार हैं।
दरअसल 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इनमें 13 सीटें NDA और 13 सीटें विपक्ष के खाते में गई हैं। अभी 37 में से 25 सीटें INDIA गठबंधन के पास हैं, जबकि 12 सीटें NDA के पास हैं। हालांकि चुनाव के बाद यह तस्वीर बदल सकती है और NDA को लगभग 8 सीटों का फायदा होने की संभावना जताई जा रही है।
तीनों राज्यों का गणित समझिए
हरियाणा: 2 सीटें, 3 उम्मीदवार – क्रॉस वोटिंग से बदल सकता है खेल
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। राज्यसभा की 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। जीत के लिए 31 वोट जरूरी हैं।
BJP के पास 48 विधायक हैं, इसलिए उसके उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद 7 वोट बचेंगे, जो निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मिल सकते हैं।
अगर 3 निर्दलीय और INLD के 2 विधायक उनका समर्थन करते हैं, तो संख्या 22 तक पहुंच सकती है, जो जीत से अभी भी 9 वोट कम है।
वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। अगर सभी एकजुट रहे तो पार्टी के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को आसानी से 31 से ज्यादा वोट मिल सकते हैं। लेकिन क्रॉस वोटिंग हुई तो नतीजे पलट सकते हैं। ऐसा पहले भी हो चुका है। 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनाव में संख्याबल होने के बावजूद कांग्रेस का उम्मीदवार हार गया था।
बिहार: 5 सीटों पर चुनाव, कांग्रेस के 2 विधायक गायबबिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। यहां 5 राज्यसभा सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं।
NDA के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं।
राज्यसभा चुनाव के हिसाब से 41 वोट में एक सीट जीत होती है। इस हिसाब से NDA आसानी से 4 सीटें जीत सकता है, जिसके लिए उसे 164 वोट चाहिए। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे, जबकि 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए।
वहीं महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, इसलिए यहां भी क्रॉस वोटिंग की स्थिति में समीकरण बदल सकते हैं।
ओडिशा: 4 सीटों पर 5 उम्मीदवार, चौथी सीट पर मुकाबला
ओडिशा विधानसभा में कुल 147 विधायक हैं। यहां 4 राज्यसभा सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में हैं। जीत के लिए 30 वोट जरूरी हैं।
BJP के दो उम्मीदवार मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
वहीं BJD के पास 48 वोट हैं और उसने दो उम्मीदवार – संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता को मैदान में उतारा है। मिश्रा की जीत लगभग तय है।
लेकिन चौथी सीट पर असली मुकाबला बना हुआ है। BJP ने दिलीप राय को समर्थन दिया है, जबकि कांग्रेस के 14 और माकपा के 1 विधायक दत्तेश्वर होता के साथ हैं।
ऐसे में यहां भी क्रॉस वोटिंग हुई तो नतीजे बदल सकते हैं।









