
US Supreme Court blocks Trump’s tariff decision, prompting a frustrated Trump to impose a 10% global tariff. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के कुछ घंटे बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के अधिकांश देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया। जानिए पूरा मामला, भारत पर असर और नई व्यापार नीति।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का बड़ा कदम
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने के महज तीन घंटे के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने शुक्रवार को एक आदेश पर हस्ताक्षर कर इस फैसले को लागू किया। यह नया टैरिफ 24 फरवरी की आधी रात से लागू होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि संसद यानी कांग्रेस को है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्वारा इस तरह की आर्थिक शक्तियों का एकतरफा इस्तेमाल संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया, जजों पर साधा निशान
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “बहुत निराशाजनक” बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के कुछ जजों पर उन्हें शर्म आती है और वे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं रखते। ट्रंप ने जजों को “कट्टर वामपंथियों के प्रभाव में” बताते हुए आरोप लगाया कि वे अमेरिका को मजबूत बनाने वाले फैसलों का विरोध करते हैं। उन्होंने उन तीन कंजरवेटिव जजों की सराहना भी की, जिन्होंने इस फैसले से असहमति जताई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि टैरिफ लागू करने के लिए उन्हें संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं है और वे राष्ट्रपति को मिले अधिकारों के तहत इसे लागू कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कंपनियों से वसूले गए टैरिफ का पैसा वापस नहीं करेगी।
भारत समेत कई देशों पर 10% टैरिफ लागू
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले कई देशों — जैसे भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन — को अब 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। हालांकि भारत के लिए यह कुछ राहत की खबर भी है, क्योंकि पहले अमेरिका ने भारत पर 18% टैरिफ लागू किया था, जो अब घटकर 10% रह जाएगा। ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते पर भरोसा जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री **नरेंद्र मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।
सेक्शन 122 के तहत लगाया गया टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने इस नए टैरिफ को लागू करने के लिए 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का सहारा लिया है। यह प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट की स्थिति में अस्थायी रूप से आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
इस कानून के तहत लगाए गए टैरिफ आमतौर पर 150 दिनों तक लागू रह सकते हैं, जिसके दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर समान 10% टैरिफ लागू करने से उन देशों पर टैरिफ दर कम हो जाएगी, जिन पर पहले अधिक शुल्क लगाया गया था।
किन उत्पादों को मिली छूट
ट्रंप प्रशासन ने कुछ आवश्यक वस्तुओं को नए टैरिफ से छूट दी है। इनमें कुछ कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर और संतरा, महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और यात्री वाहन शामिल हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि नया टैरिफ पुराने टैरिफ की जगह लेगा और इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले भी लग चुका है 10% ग्लोबल टैरिफ
इतिहास में इससे पहले 1971 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वैश्विक व्यापार असंतुलन को देखते हुए दुनिया भर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। उस समय अमेरिका भारी व्यापार घाटे और डॉलर पर बढ़ते दबाव का सामना कर रहा था। इसके बाद भविष्य में आर्थिक संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति को विशेष अधिकार देने के उद्देश्य से 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रंप प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है, इसलिए इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल कर व्यापक टैरिफ लगाना उचित नहीं है। हालांकि अदालत के तीन जज — सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ — ने फैसले से असहमति जताई। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने अपने नोट में कहा कि टैरिफ नीति की उपयोगिता अलग मुद्दा हो सकती है, लेकिन यह राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा संवेदनशील निर्णय है।
टैरिफ विवाद और कानूनी लड़ा
टैरिफ विवाद के केंद्र में इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) रहा, जिसका इस्तेमाल ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक टैरिफ लागू करने के लिए किया था। यह कानून 1977 में बनाया गया था और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय आपात स्थितियों में राष्ट्रपति को विशेष आर्थिक शक्तियां देना था। ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों और कई छोटे कारोबारियों ने अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात पर टैरिफ लगाए। इससे पहले निचली अदालतें भी इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दे चुकी थीं।
व्यापार नीति और वैश्विक असर
रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप प्रशासन अब तक टैरिफ के जरिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा की वसूली कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस रकम की वापसी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए टैरिफ आदेश से वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अमेरिकी आर्थिक नीति पर व्यापक असर पड़ सकता है। आने वाले समय में इस मामले को लेकर अदालतों और सरकार के बीच लंबी कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है।










