
US-Israel-Iran war Day-7, major attack on Iran's Shiraz city, 20 killed, मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Iran, Israel और United States के बीच चल रहे इस संघर्ष का आज सातवां दिन है। ताजा घटनाओं में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के दक्षिणी शहर शिराज पर बड़ा हमला किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक इस हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और करीब 30 लोग घायल हुए हैं।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला शहर के जीबाशहर इलाके के रिहायशी क्षेत्र में हुआ, जहां आम नागरिक रहते हैं। हमले में कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा और दो मेडिकल कर्मचारियों की भी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे ईरान में गुस्से का माहौल है और सरकार ने इसे नागरिक इलाकों पर हमला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।
ईरान ने गिराए अमेरिकी और इजराइली ड्रोन
इस बीच ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने दो दुश्मन ड्रोन मार गिराए हैं। इनमें एक अमेरिका का MQ-9 रीपर ड्रोन और दूसरा इजराइल का Hermes-900 ड्रोन शामिल है। ईरानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन को पश्चिमी ईरान के लोरेस्तान इलाके में गिराया गया, जबकि इजराइली ड्रोन को तेहरान के पास निशाना बनाया गया।
इन ड्रोन को गिराए जाने को ईरान अपनी सैन्य क्षमता का संकेत बता रहा है। ईरान का कहना है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली लगातार सक्रिय है और वह अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
युद्ध का असर वैश्विक व्यापार पर
इस युद्ध का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ने लगा है। फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ने के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
France के परिवहन मंत्री ने बताया कि फारस की खाड़ी में 52 फ्रांसीसी जहाज फंसे हुए हैं, जबकि 8 जहाज रेड सी में रुके हुए हैं। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। फ्रांस सरकार जहाजों पर मौजूद अपने नागरिकों के संपर्क में है और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अन्य देशों के साथ बातचीत कर रही है।
ईरान में बड़े पैमाने पर तबाही
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 3000 से ज्यादा घरों और करीब 500 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। इन हमलों का सबसे ज्यादा असर राजधानी तेहरान में देखा गया है।
संस्था के मुताबिक 14 अस्पताल और मेडिकल सेंटर भी हमलों में क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत कार्यों के दौरान संस्था के पांच कर्मचारी भी घायल हुए हैं।
इस पूरे संघर्ष में अब तक ईरान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल ने ईरान के करीब 300 मिसाइल लॉन्चर तबाह कर दिए हैं।
पानी और बिजली की आपूर्ति बाधित
लगातार बमबारी के कारण ईरान के कई शहरों में बुनियादी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। कई इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई है। इससे आम नागरिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान सरकार ने कहा है कि वह तेजी से मरम्मत का काम कर रही है, लेकिन लगातार हमलों के कारण हालात सामान्य करना मुश्किल हो रहा है।
ईरान के गर्ल्स स्कूल पर हमला
युद्ध के दौरान एक बेहद दुखद घटना उस समय सामने आई जब दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ। इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल थीं।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Türk ने इस घटना की जल्द और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर यह हमला जानबूझकर किया गया है तो इसे युद्ध अपराध माना जाएगा।
लेबनान में भी बढ़ा संघर्ष
इस युद्ध का असर पड़ोसी देशों पर भी दिख रहा है। Lebanon में इजराइल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई हवाई हमले किए हैं। लेबनान की राजधानी बेरुत के दक्षिणी इलाके दहिया में इजराइली सेना ने 26 बार बमबारी की। इन हमलों में हिजबुल्लाह के दफ्तर और ड्रोन गोदामों को निशाना बनाया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इन हमलों में अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
लाखों लोग हुए बेघर
लेबनान में लगातार हो रही बमबारी के कारण बड़े पैमाने पर लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इजराइली सेना के मुताबिक अब तक करीब पांच लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। दक्षिणी लेबनान से ही 4 लाख से ज्यादा लोग सुरक्षित जगहों की ओर पलायन कर चुके हैं।
खाड़ी देशों पर हमले
ईरान ने इस संघर्ष के दौरान कई खाड़ी देशों की दिशा में भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन देशों में United Arab Emirates, Kuwait, Bahrain, Saudi Arabia, Jordan और Iraq शामिल हैं।
ईरान ने बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी BAPCO पर भी मिसाइल से हमला किया, जिससे रिफाइनरी की एक यूनिट में आग लग गई। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया।
कतर के अमेरिकी एयरबेस पर हमला नाकाम
Qatar की राजधानी दोहा के पास स्थित अल उदीद एयरबेस पर भी ड्रोन हमला करने की कोशिश की गई। यह मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। कतर की एयर डिफेंस प्रणाली ने समय रहते ड्रोन को मार गिराया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
ब्रिटेन में जासूसी के शक में गिरफ्तारी
इस युद्ध के बीच United Kingdom में भी एक बड़ी कार्रवाई हुई है। ब्रिटेन की पुलिस ने ईरान के लिए जासूसी करने के शक में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये लोग लंदन में यहूदी समुदाय से जुड़े स्थानों की निगरानी कर रहे थे।
रूस को मिला आर्थिक फायदा
युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। Russia ने कहा है कि इस संघर्ष के कारण उसके तेल और गैस की मांग बढ़ गई है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov के मुताबिक कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस की ओर रुख कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
इस युद्ध के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य भी प्रभावित हुआ है। इस रास्ते से दुनिया की करीब 20% तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है।
हालांकि ईरान का कहना है कि उसने इस मार्ग को बंद नहीं किया है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण जहाजों की आवाजाही कम हो गई है।
भारत को मिली राहत
इस संकट के बीच India के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष लाइसेंस दिया है, जिसके तहत भारत समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकता है।
इस फैसले से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का खतरा फिलहाल टल गया है।
ट्रम्प का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी हमला नहीं करेगा। उन्होंने इसे समय की बर्बादी बताया।
हालांकि ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर हमले और तेज किए जाएंगे।
ईरान का जवाब
ईरान के उप-विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh ने कहा है कि उनका देश आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमले ईरान की संप्रभुता पर हमला हैं और देश इसकी पूरी ताकत से जवाब देगा।
युद्ध की भारी लागत
इस युद्ध की आर्थिक कीमत भी बेहद भारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध के पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को करीब 3.7 अरब डॉलर खर्च करने पड़े।
कुल मिलाकर अब तक इस युद्ध से करीब 4.35 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अभी और लंबा चल सकता है। इजराइल के सेना प्रमुख Eyal Zamir ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अब अगले चरण में प्रवेश कर रहा है और आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं।
दूसरी ओर कई देश इस युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात शांत होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।









