
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पिछले साल बड़े आंदोलन का नेतृत्व करने वाली जॉइंट एक्शन कमेटी (Joint Action Committee) ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के साथ किसी भी तरह की आगे की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। कमेटी का आरोप है कि 4 अक्टूबर 2024 को हुए समझौते के तहत पाकिस्तान सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में बातचीत का कोई औचित्य नहीं बचता।
समझौते के वादे पूरे न होने पर जताई नाराजगी
जॉइंट एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार के कश्मीर मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पत्र में कहा गया है कि समझौते के तहत सभी मांगें 90 दिनों के भीतर पूरी होनी थीं, लेकिन डेडलाइन खत्म होने में सिर्फ चार दिन बचे हैं और कोई भी प्रमुख मांग अब तक पूरी नहीं की गई। कमेटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी।
बैठक का प्रस्ताव भी किया खारिज
पाकिस्तान सरकार ने जॉइंट एक्शन कमेटी को एक और बैठक का प्रस्ताव दिया था, जिसे कमेटी ने सिरे से खारिज कर दिया है। कमेटी का कहना है कि सरकार जानबूझकर मामले को टाल रही है और देरी कर रही है। समझौते में हर 15 दिन में समीक्षा बैठक का प्रावधान था, लेकिन पिछले तीन महीनों में सिर्फ दो बैठकें ही हुई हैं, जो सीधे तौर पर समझौते का उल्लंघन है।
शहबाज सरकार पर गंभीर आरोप
जॉइंट एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ECL) से कमेटी के प्रमुख सदस्यों के नाम न हटाना
आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज FIR वापस न लेना
रिफ्यूजी सीटों से जुड़े विवादों का समाधान न करना
कमेटी का कहना है कि सरकार ने समझौते के कई नियमों का खुला उल्लंघन किया है।
आंदोलन दोबारा शुरू करने की तैयारी
जॉइंट एक्शन कमेटी के सीनियर सदस्य शौकत नवाज मीर ने कहा कि जब समझौते की समयसीमा खत्म होने वाली है, ठीक उसी वक्त सरकार ने नई कमेटी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने इसे मुद्दे को टालने और समय खींचने की रणनीति बताया।
उन्होंने साफ कहा कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक जॉइंट एक्शन कमेटी किसी भी बैठक में शामिल नहीं होगी। कमेटी एक बार फिर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।
निष्कर्ष
POK में एक बार फिर असंतोष गहराता जा रहा है। अगर पाकिस्तान सरकार ने जल्द ही समझौते के वादों को पूरा नहीं किया, तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में POK में बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं









