
The government is preparing to take a major step in digital arrest cases, डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में गृह मंत्रालय की हाई लेवल कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि यदि बैंकों या टेलिकॉम कंपनियों की लापरवाही के कारण किसी पीड़ित को आर्थिक नुकसान होता है, तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। यह निष्कर्ष शीर्ष अदालत के आदेश पर गठित मंत्रालय की इंटरनल कमिटी की बैठक में सामने आया।
कमिटी की बैठक में डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी रोकने के लिए सिम कार्ड जारी करने के नियमों को और सख्त करने पर भी चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत गृह मंत्रालय ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कमिटी गृह मंत्रालय में विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में कार्य करेगी।
पीड़ितों को मुआवजे पर भी मंथन
बैठक में पीड़ितों को मुआवजा देने से संबंधित एमिकस क्यूरी की सिफारिशों पर विचार किया गया। कमिटी ने माना कि सिस्टम फेल्योर या संस्थागत लापरवाही के कारण पीड़ितों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। कमिटी के अध्यक्ष ने मौजूदा मुआवजा व्यवस्था की समीक्षा कर उसमें सुधार के सुझाव देने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने इस विषय पर और चर्चा के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
एक तय सीमा के बाद CBI करेगी जांच
कोर्ट को यह भी बताया गया कि कमिटी की बैठक हर दो सप्ताह में होगी, जिसमें अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि भी शामिल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, कमिटी की पहली बैठक 29 दिसंबर को हुई थी। इस बैठक में CBI ने डिजिटल अरेस्ट मामलों के लिए एक निश्चित मौद्रिक सीमा तय करने का सुझाव दिया। तय सीमा से अधिक रकम वाले मामलों की जांच CBI करेगी, जबकि इससे कम मामलों की जांच राज्य एजेंसियां गृह मंत्रालय की मदद से करेंगी।
सिम कार्ड फर्जीवाड़े पर कसेगा शिकंजा
बैठक में RBI ने बताया कि बैंकों को फ्रॉड की पहचान के लिए एआई-आधारित टूल्स अपनाने संबंधी परामर्श जारी किया गया है। संदिग्ध लेनदेन वाले खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
वहीं, दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत ड्राफ्ट नियम तैयार किए गए हैं और फिलहाल हितधारकों से परामर्श जारी है। अधिसूचना के बाद ये नियम सिम कार्ड जारी करने में लापरवाही, एक व्यक्ति को कई सिम जारी करने जैसी समस्याओं पर रोक लगाएंगे।
फ्रॉड राशि की रिकवरी और रिफंड पर SOP तैयार
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बताया कि तुरंत खाते फ्रीज करने, डी-फ्रीजिंग, धन वसूली और पीड़ितों को राशि वापस दिलाने से जुड़ी SOPs पर विचार चल रहा है। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर भी काम किया जा रहा है।









