
कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने देश में मुसलमानों की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ता ध्रुवीकरण और समुदाय विशेष के खिलाफ हो रही घटनाएं एक असुरक्षा का वातावरण बना रही हैं। बडगाम में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मीरवाइज ने मौजूदा हालात को “कठिन और चुनौतीपूर्ण समय” बताया।
“बेआवाजों की आवाज बनना होगा”
मीरवाइज ने आरोप लगाया कि मस्जिदों पर बुलडोजर चलाने, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और हमलों की खबरों ने समुदाय में भय का माहौल पैदा किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में समाज के जिम्मेदार लोगों को आगे आकर “बेआवाजों की आवाज” बनना होगा। उनके मुताबिक, डर और अविश्वास का यह माहौल सामाजिक ताने-बाने के लिए ठीक संकेत नहीं है।
रमजान के महीने में सरकार से हस्तक्षेप नहीं करने की अपील
रमजान के पवित्र महीने का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने कहा कि यह आत्मचिंतन, संयम और प्रार्थना का समय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस वर्ष रमजान के दौरान कोई हस्तक्षेप न हो और शुक्रवार की नमाज, जुमातुल-विदा, शब-ए-कद्र और ईद की नमाज सहित सभी सामूहिक इबादतें बिना किसी प्रतिबंध के शांतिपूर्वक संपन्न हों। उनका कहना था कि जब दुनिया भर में मुसलमान विभिन्न संकटों से जूझ रहे हैं, तब समुदाय को भीतर से मजबूत होने और युवाओं के चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत है।
फिलिस्तीन और पश्चिम एशिया पर भी जताई चिंता
मीरवाइज ने फिलिस्तीन में जारी हिंसा और पश्चिम एशिया में बढ़ती अशांति को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की जान जा रही है और हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इसी संदर्भ में ईरान सहित क्षेत्र के अन्य हिस्सों में अस्थिरता के प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। उनके मुताबिक, विभिन्न क्षेत्रों में मुसलमानों की पीड़ा गहरी और चिंताजनक है।
सामाजिक सौहार्द की जरूरत
अपने संबोधन के अंत में मीरवाइज ने संवाद, संयम और सामाजिक सौहार्द को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में टकराव नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की जरूरत है। रमजान से पहले दिया गया यह संदेश न सिर्फ कश्मीर बल्कि पूरे देश में सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।










