
Tamilnadu CM Stalin supports new UGC rules, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 2026 के भेदभाव विरोधी नियमों का समर्थन करते हुए इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से मौजूद भेदभाव और संस्थागत उदासीनता को सुधारने की दिशा में एक जरूरी, भले ही देर से उठाया गया, कदम बताया है। हालांकि उन्होंने इन नियमों के लागू होने की प्रक्रिया और उनकी स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं भी व्यक्त कीं। देशभर में जारी विरोध के बीच स्टालिन के इस समर्थन से उत्तर और दक्षिण भारत में राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।
X पोस्ट के जरिए नियमों का बचाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत बयान में स्टालिन ने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और संस्थागत उपेक्षा से प्रभावित रही है, जिसे सुधारने के लिए ये नियम जरूरी हैं।
छात्र आत्महत्या और उत्पीड़न पर जताई चिंता
स्टालिन ने कहा कि केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है, खासकर SC और ST समुदाय के छात्रों के बीच। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत, कश्मीर और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के खिलाफ उत्पीड़न और हमलों की घटनाएँ भी सामने आई हैं।
उनके अनुसार, ऐसे माहौल में समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करना विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।
OBC को शामिल करने के प्रयास का समर्थन
स्टालिन ने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म करने और OBC समुदाय को भी इस व्यवस्था में शामिल करने का प्रयास समर्थन योग्य है। उन्होंने मंडल आयोग के समय हुए विरोध का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा विरोध भी उसी मानसिकता से प्रेरित लगता है।
इक्विटी कमेटियों की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
DMK प्रमुख ने रोहित वेमुला मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जब विश्वविद्यालयों के कुलपतियों पर ही आरोप लगे हों, तब यह सवाल उठता है कि यदि समानता समितियों की अध्यक्षता संस्थानों के प्रमुख करेंगे तो वे कितनी स्वतंत्रता से काम कर पाएंगी, खासकर तब जब कई संस्थानों का नेतृत्व वैचारिक रूप से प्रभावित माना जाता है।
सरकार से नियमों को मजबूत लागू करने की मांग
स्टालिन ने कहा कि यदि केंद्र सरकार छात्र आत्महत्याएँ रोकने, भेदभाव समाप्त करने और पिछड़े वर्गों के छात्रों की ड्रॉपआउट दर कम करने को लेकर गंभीर है, तो इन नियमों को केवल मजबूत ही नहीं बल्कि जवाबदेही के साथ लागू भी किया जाना चाहिए।









