
सुपवा में फैकेल्टी ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के छात्रों को किया ट्रेंड
पांच दिवसीय कार्यशाला में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ ने बनाया पारंगत
रोहतक 21 फरवरी 2026
SUPVA aims to make students technically skilled planners: VC Dr Amit Arya, दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में योजना और वास्तुकला विभाग (आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग डिपार्टमेंट) में पढ़ने वाले छात्र यहां से शिक्षित होकर और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित व पर्यावरण के अनुकूल शहर बसाने की प्लानिंग करेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें पांच दिवसीय कार्यशाला में ट्रेंड किया गया। कार्यशाला के दौरान उन्हें भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ पवन कुमार ने विभिन्न तकनीकी बारीकियों की जानकारी दी।

छात्रों को आधुनिक शहरीकरण में जरूरी तकनीकी जरूरतों के बारे में बताया
17 फरवरी को शुरू हुई कार्यशाला का शनिवार को समापन हो गया। इसमें छात्रों को आधुनिक शहरीकरण में जरूरी तकनीकी जरूरतों के बारे में बताया गया। मूलभूत अवधारणाओं से लेकर उच्च-स्तरीय तकनीकी मॉड्यूल डिजाइन के बारे में बताया गया, ताकि अत्याधुनिक व एडवांस शहरी योजनाकारों को ‘स्किल अप’ बनाया जा सके।
स्नातक केवल योजनाकार ही नहीं, बल्कि स्थानिक डेटा वैज्ञानिक भी हों
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि सुपवा के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में प्लानिंग से जुड़े इन उपकरणों का एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि स्नातक केवल योजनाकार ही नहीं, बल्कि स्थानिक डेटा वैज्ञानिक भी हों, जो भविष्य के सतत शहरों को डिजाइन करने में सक्षम हों। डॉ आर्य ने कहा कि उन्नत भौगोलिक उपकरणों में दक्षता प्राप्त करके, हमारे छात्र पारंपरिक ड्राफ्टिंग से आगे बढ़कर ऐसे स्थानिक डेटा विश्लेषक बन रहे हैं, जो चुनौतियों की कल्पना कर सकते हैं और एक भी ईंट रखे जाने से पहले टिकाऊ समाधान का मानचित्र तैयार कर सकते हैं।
सुपवा के योजना छात्र डिजिटल “सुपरपॉवर” में माहिर हो गए हैं
योजना और वास्तुकला विभाग के एफसी अजय बाहु जोशी ने बताया कि पांच दिवसीय कार्यशाला के दौरान छात्रों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विशिष्ट डिजिटल ब्लूप्रिंट बनाने और उपग्रह चित्रों का उपयोग करके यह ट्रैक करना सीखा कि हमारे शहर कैसे बढ़ रहे हैं। भविष्य में बाढ़ से बचने के लिए पानी भूमि पर कैसे बहता है और नए भवनों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान चुनने के लिए पर्यावरण का विश्लेषण करना, आदि विस्तार से सिखाया गया। ये छात्र सिर्फ ड्राइंग बनाने के स्तर से आगे बढ़ गए हैं। अब वे डेटा और तकनीक का उपयोग करके सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य के शहर हर किसी के लिए अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हों। सुपवा के योजना छात्र डिजिटल “सुपरपॉवर” में माहिर हो गए हैं, जिसे जीआईएस और रिमोट सेंसिंग कहा जाता है, जो हमारे शहरों के लिए उच्च तकनीकी एक्स-रे के समान कार्य करता है। डीन अकेडमिक अफेयर्स डॉ अजय कौशिक ने कहा कि सुपवा का लक्ष्य अपने छात्रों को तकनीकी रूप से कुशल योजनाकार में बदलना है, जो प्रत्येक डिजाइन निर्णय को सटीक स्थानिक साक्ष्यों के साथ समर्थित कर सकें।









