
गुरुवार को Supreme Court of India ने फ्रीबीज कल्चर (मुफ्त सुविधाओं) को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सरकार लोगों को सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली देती रहेगी तो लोगों की काम करने की आदत खत्म हो सकती है। कोर्ट ने सरकारों को रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि गरीबों की मदद करना उचित है, लेकिन बिना आर्थिक स्थिति का आकलन किए सभी को मुफ्त सुविधाएं देना सही नीति नहीं हो सकती।
कोर्ट की सख्त टिप्पण
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राज्य सरकारों को ऐसी योजनाओं और विकास के बीच संतुलन बनाना होगा। अदालत ने कहा कि लोगों को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए ताकि वे अपनी आय से सम्मानजनक जीवन जी सकें। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव के आसपास ही अक्सर मुफ्त योजनाओं की घोषणा क्यों की जाती है और क्या यह विकास में बाधा नहीं बनती।
तमिलनाडु की फ्री बिजली योजना पर सुनवाई
अदालत Tamil Nadu Power Distribution Corporation Limited की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के नियम 23 को चुनौती दी है, जिसमें उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव है। तमिलनाडु में घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो महीने में लगभग 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाती है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।
पहले भी जता चुका है चिंता
सुप्रीम कोर्ट पहले भी मुफ्त योजनाओं पर चिंता जता चुका है। अदालत ने कहा था कि लगातार मुफ्त सुविधाएं देने से लोगों की काम करने की इच्छा प्रभावित हो सकती है और सरकार को कल्याणकारी योजनाओं के साथ रोजगार सृजन पर भी ध्यान देना चाहिए।










