
Supreme Court reprimands Vijay Shah for his comments on Colonel Sophia Qureshi, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्री द्वारा दी गई ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अब माफी मांगने का समय निकल चुका है। सोमवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने या न देने पर दो हफ्ते के भीतर फैसला लिया जाए।
SIT रिपोर्ट पर देरी को लेकर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद राज्य सरकार ने कई महीनों तक कोई निर्णय नहीं लिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर कार्रवाई रोके रखना कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, स्वीकार्य नहीं है।
महू में दिया था विवादित बयान
11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान दिया था। उन्होंने आतंकियों को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर देशभर में कड़ी आलोचना हुई और कर्नल सोफिया कुरैशी को अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया गया। इस बयान के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर 14 मई को महू के मानपुर थाने में मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
“यह माफी नहीं, जिम्मेदारी से बचने की कोशिश”
सुनवाई के दौरान विजय शाह की ओर से सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा— “माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। यह कोई सच्ची माफी नहीं है।”
ऑनलाइन माफी को भी अदालत ने नाकाफी और निष्ठाहीन बताया
कोर्ट ने पहले भी विजय शाह की सार्वजनिक माफी को “कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मगरमच्छ के आंसू” करार देते हुए खारिज कर दिया था। ऑनलाइन माफी को भी अदालत ने नाकाफी और निष्ठाहीन बताया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि SIT रिपोर्ट में विजय शाह से जुड़े कुछ और मामलों का जिक्र है, जिनमें कथित तौर पर उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया है कि इन मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर भी रिपोर्ट पेश की जाए।
“आप पब्लिक फिगर हैं, शब्दों की जिम्मेदारी समझिए”
कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाते हुए कहा कि वे एक सार्वजनिक पद पर हैं और उन्हें बोलते समय अपने शब्दों की गंभीरता समझनी चाहिए। अदालत ने कहा— “आप जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। आपको आत्मचिंतन करना चाहिए।”
जुलाई में भी जताई थी नाराजगी
गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि माफी में न तो संवेदनशीलता दिखी और न ही अपनी गलती स्वीकार करने की ईमानदारी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद निगाहें मध्य प्रदेश सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि वह मंत्री विजय शाह के खिलाफ कानून के मुताबिक आगे क्या कदम उठाती है।









