सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : “सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है -मोदी

somanath swabhiman utsav
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somanath swabhiman utsav,“सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। आततायी सोचते रहे कि उन्होंने सोमनाथ को जीत लिया, लेकिन एक हजार साल बाद भी लहरा रही धर्म-ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति और सामर्थ्य का संदेश दे रही है। सोमनाथ और भारत—दोनों को मिटाने की कोशिशें हुईं, लेकिन न सोमनाथ मिटा, न भारत।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर ये शब्द कहकर भारत की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना को एक बार फिर स्पष्ट शब्दों में सामने रखा।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की आस्था और गौरव का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर अद्भुत है, वातावरण दिव्य है और यह उत्सव भारत की आस्था और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति इस आयोजन को अलौकिक बना रही है।

108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा

प्रधानमंत्री ने बताया कि 72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद, मंत्रोच्चार, एक हजार ड्रोन के माध्यम से सोमनाथ के एक हजार वर्षों के इतिहास का प्रदर्शन और 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा इस पर्व को ऐतिहासिक बना रही है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन गर्व, गरिमा, वैभव, अध्यात्म और देवाधिदेव महादेव के आशीर्वाद का संगम है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मन में यह प्रश्न उठता है कि ठीक एक हजार साल पहले इसी भूमि पर हमारे पूर्वजों ने किस प्रकार अपनी आस्था की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों को लगा कि उन्होंने भारत की आस्था को परास्त कर दिया, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर लहराती धर्म-ध्वजा भारत की शक्ति का उद्घोष कर रही है।

सोमनाथ की हजार साल की संघर्षगाथा

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने वीर-वीरांगनाओं को नमन करते हुए कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया, उनका बलिदान भारत की आत्मा में समाया हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि प्रभास पाटन की भूमि केवल शिव से ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत काल से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि यह पर्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि एक ओर सोमनाथ की हजार साल की संघर्षगाथा पूरी हो रही है, वहीं 1951 में हुए पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।

सच्चे इतिहास को छिपाया गया

प्रधानमंत्री ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई बार सोमनाथ को तोड़ने के प्रयास हुए, लेकिन हर बार भारत की आस्था ने मंदिर का पुनर्निर्माण किया। उन्होंने कहा कि अगर हम इतिहास को देखें तो साफ है कि यह संघर्ष आस्था को मिटाने का था, केवल लूट का नहीं, जैसा कि वर्षों तक बताया गया। पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद भी कुछ ताकतों ने सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों के इतिहास को दबाने और विकृत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण सच्चे इतिहास को छिपाया गया और आक्रमणों को साधारण घटनाओं की तरह प्रस्तुत किया गया।

सोमनाथ का पुनर्निर्माण राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जाम साहब दिग्विजय सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था, जिसे उस समय भी रोकने की कोशिशें की गईं। पीएम मोदी ने कहा कि आज भी देश के खिलाफ साजिशें हो रही हैं, बस तरीके बदल गए हैं। उन्होंने देशवासियों से एकजुट रहने और हर उस ताकत को परास्त करने का आह्वान किया जो भारत को बांटना चाहती है।

भारत विरासत से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत विरासत से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विकास के कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि आस्था और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता नफरत नहीं, बल्कि संतुलन और सृजन का संदेश देती है। सोमनाथ की हजार वर्षों की यात्रा पूरी मानवता को यही सिखाती है कि जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना चाहती हैं, वे स्वयं इतिहास में खो जाती हैं। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से प्रेरणा लेकर देश को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा और आने वाले हजार वर्षों के लिए भारत को और अधिक सशक्त बनाना होगा।

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