
उस्मान हादी, जिनका पूरा नाम Sharif Usman Hadi है, बांग्लादेश के एक उभरते हुए युवा राजनीतिक नेता और छात्र आंदोलन से निकले प्रभावशाली चेहरा थे। वे पारंपरिक राजनीति से अलग सोच रखने वाले छात्र नेता माने जाते थे । Sharif Usman Hadi सत्ता के खिलाफ जनता की सशक्त आवाज बने । खास तौर पर युवा वर्ग, छात्र और सरकार से नाराज़ लोग उन्हें अपना प्रतिनिधि मानने लगे थे। उनकी राजनीति का केंद्र लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे थे, जिसकी वजह से वे बहुत कम समय में एक चर्चित राष्ट्रीय चेहरा बन गए थे ।
Sharif Usman Hadi का राजनीतिक सफर
Sharif Usman Hadi का राजनीतिक सफर छात्र आंदोलनों से शुरू हुआ। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बेरोज़गारी, चुनावी निष्पक्षता और सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई। वर्ष 2024–25 के दौरान बांग्लादेश में जो बड़े जन आंदोलन देखने को मिले, उनमें Sharif Usman Hadi एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए। वे रैलियों, सभाओं और सोशल मीडिया के ज़रिए सीधे सरकार पर निशाना साधते थे। यही कारण था कि उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो बिना डरे सत्ता को सवालों के कटघरे में खड़ा करता था ।
शेख हसीना सरकार का विरोधी
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग से उस्मान हादी का विवाद धीरे-धीरे गहराता चला गया थ । हादी ने शेख हसीना सरकार पर आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है चुनाव तो केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। हादी का कहना था कि सरकार युवाओं के भविष्य से समझौता कर रही है और सत्ता को बनाए रखने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है। उनके ये बयान सरकार समर्थकों को सीधे चुनौती देते थे।
भारत विरोधी था नजरिया
Sharif Usman Hadi का का नजरिया भारत विरोधी था । चूंकि शेख हसीना भारत समर्थक रही है जिसके चलते हादी मानता था कि शेख हसीना बांग्लादेश के हितों से समझौता कर रही है। हादी पर “भारत-विरोधी राजनीति” करने के आरोप भी लगे। सरकार समर्थक गुटों का कहना था कि हादी की भाषा भड़काऊ है और इससे देश में अस्थिरता फैल रही है, जबकि उनके समर्थकों का मानना था कि वे सिर्फ सच्चाई को सामने रख रहे हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान हादी को मारी थी गोली
बता दें कि फरवरी 2026 में बांग्लादेश में आम चुनाव में होने हैं, जहां ढाका-8 निर्चावन क्षेत्र स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर Sharif Usman Hadi चुनाव प्रचार कर रहे थे । इसी दौरान 12 दिसंबर दिसंबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग कर दी थी । गोली उनके सिर में लगी थी । जिसके बाद हादी को अस्पताल भर्ती कराया गया था । सोमवार को हादी की हालत बिगड़ गई तो उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर जनरल अस्पताल ले जाया गया था, जहां कल रात उसकी मौत हो गई, डॉक्टरों का कहना है कि ‘गोली की वजह से लगी चोट के कारण उस्मान का ब्रेनडेड हो गया था, उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद हादी को बचाया नहीं जा सका।’
उस्मान हादी की मौत से बांग्लादेश में बवाल
जैसे ही उस्मान हादी की मौत की खबर आई बांग्लादेश में जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश देखने को मिला। उनके समर्थकों ने इसे सामान्य घटना मानने से इनकार कर दिया और इसे राजनीतिक साजिश बताया। देखते ही देखते ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो कई जगह हिंसक रूप ले बैठे। सरकारी इमारतों, निजी संपत्तियों और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया गया। कुछ स्थानों पर भारत-विरोधी नारे भी लगाए गए, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।
इस हिंसा ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल दिया। सरकार पर सुरक्षा में चूक और निष्पक्ष जांच कराने का दबाव बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्ष ने उस्मान हादी की मौत को सत्ता की विफलता बताया, जबकि सरकार समर्थक इसे अराजक तत्वों द्वारा फैलाया गया हिंसा का दौर बता रहे हैं।
लोकतंत्र, सत्ता और जनता के बीच टकराव जारी
कुल मिलाकर, Sharif Usman Hadi सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे बांग्लादेश में उभर रहे युवा असंतोष, सत्ता विरोध और राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बन गए थे। उनकी मौत ने यह साफ कर दिया कि देश में लोकतंत्र, सत्ता और जनता के बीच टकराव अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में यह मामला बांग्लादेश की राजनीति, चुनावी माहौल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है।









