
महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान हादसे में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया है। अजित पवार की मौत के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में दो बड़ी चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। पहली—दोनों एनसीपी गुटों के विलय को लेकर और दूसरी—अजित पवार के अचानक हुए निधन को लेकर।
पूरे मामले की जांच होनी चाहिए
अब अजित पवार की मौत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि इसके पीछे कुछ गड़बड़ हो सकती है, इसलिए पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भी अजित पवार के निधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अजित दादा के एक्सीडेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है और उठने भी चाहिए। जिस तरह से एक बड़े नेता की प्लेन क्रैश में मौत हुई, वह कई संदेह पैदा करती है।
अजित पवार की मौत संदिग्ध है
संजय राउत ने कहा कि अजित पवार की मौत संदिग्ध है और यह सवाल उनकी ही पार्टी के लोग उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पर्दे के पीछे कुछ न कुछ ज़रूर हुआ है और इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। आगे राउत ने कहा कि अजित पवार ने पहले यह संकेत दिए थे कि वह “घर लौटना” चाहते हैं। इसके बाद बीजेपी के कुछ लोगों ने उन्हें सिंचाई घोटाले की फाइलों को लेकर धमकाया था। हालांकि अजित पवार ने उन फाइलों का जवाब भी दिया था और कहा था कि उनके पास भी घोटालों से जुड़ी फाइलें हैं।
कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है
राउत ने कहा कि इन घटनाओं के सिर्फ 10 दिन के भीतर अजित पवार की रहस्यमय मौत हो गई। इससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इस मामले की तुलना जस्टिस लोया केस से करते हुए कहा कि क्या यहां भी कोई नया कांड किया गया है? कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है।










