
RBI strict on banking charges, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग चार्जेज़ को लेकर अब बेहद सख्त हो गया है। आरबीआई बैंकों के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम बनाने की तैयारी कर रहा है जिसमें हर तरह की फीस और सर्विस चार्ज एक ही फॉर्मेट में ग्राहकों के सामने रखे जाएँगे।
Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक इसका मुख्य लक्ष्य है—
- छुपे हुए (Hidden Charges) खत्म करना
- दोहरे (Overlapping) चार्जेज़ हटाना
- हर बैंक में फीस का एक जैसा और साफ तरीका लागू करना
बैंकों को अब अपने ग्राहकों को लोन प्रोसेसिंग फीस का पूरा ब्रेकअप भी देना होगा। यानी आगे से सिर्फ “Processing Fee: ₹X” नहीं लिखा होगा, बल्कि किस चीज़ की कितनी फीस लगी — उसका पूरा विवरण ग्राहकों को मिलेगा।
बैंकों पर क्यों सख्त हुआ RBI?
सूत्रों के अनुसार RBI चाहता है कि बैंकिंग चार्जेज़ ग्राहकों को बिल्कुल सीधी, समझने वाली और पारदर्शी भाषा में बताए जाएँ।
अक्सर लोग अपनी बैंक स्टेटमेंट या लोन डिटेल में ऐसे चार्जेज़ देख लेते हैं जिनके बारे में उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं होती। इसी समस्या को खत्म करने के लिए RBI ये बड़ा कदम उठा रहा है।
सरकार के दखल के बाद ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक पहले ही Minimum Balance Penalty हटाने का फैसला कर चुके हैं। इसका फायदा करोड़ों आम ग्राहकों को मिला है।
“बैंकों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या पूरे देश में एक ही स्टैंडर्ड फॉर्मेट लागू किया जा सकता है, जिसमें सभी चार्ज और फीस बिल्कुल स्पष्ट दिखें।” उन्होंने बताया कि इसमें लोन प्रोसेसिंग फीस का पूरा ब्रेक-अप शामिल हो सकता है ।
बैंक कस्टमर के लिए नियम और भी आसान होंगे
RBI ने बैंकों से यह भी सलाह दी है कि
हर बैंक अपनी सभी ब्रांचों में मिलने वाली समान सेवाओं की सूची बनाए
उन सभी सेवाओं पर चार्ज भी एक जैसे रखें
निजी और सरकारी बैंक इस पर अंदरूनी बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही RBI को अपनी संयुक्त राय भेजेंगे।
RBI का फोकस: ग्राहक सेवा और पारदर्शिता
हाल ही में MPC बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि
केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता अब ग्राहक सेवा है।
इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय ने भी पिछले अगस्त में संसद में बताया था कि
- पब्लिक सेक्टर बैंकों ने साधारण बचत खातों के लिए Minimum Balance Charges हटाए हैं।
- कुछ बैंकों ने अपनी नीतियों के अनुसार ये चार्ज कम किए या तर्कसंगत बनाए हैं।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था कि इस कदम से बैंकों में जमा राशि बढ़ने की संभावना भी है।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण जानकारी जो इस खबर से जुड़ी है (पुख्ता और सही):
ATM चार्जेज़ पर RBI पहले ही सख्त हो चुका है
1 मई 2025 से नए ATM नियम लागू हैं, जिनमें फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद बैंक ₹23 तक शुल्क ले सकते हैं — लेकिन यह पहले से ग्राहकों को साफ-साफ बताना अनिवार्य है।
क्रेडिट कार्ड ओवर-लिमिट चार्ज पर रोक
RBI ने क्रेडिट कार्ड पर ओवर-लिमिट चार्ज को लेकर सख्त नियम बनाए हैं ताकि ग्राहकों पर बिना जानकारी अतिरिक्त शुल्क न डाला जाए।
प्री-पेमेंट चार्ज खत्म होने की ओर
1 जनवरी 2026 से floating rate loans (जैसे Home Loan) पर प्री-पेमेंट चार्ज पूरी तरह खत्म होने जा रहा है।
यह कदम भी ग्राहकों को छिपे हुए शुल्कों से राहत देता है।
बैंकों को “Uniform Fee Disclosure Format” तैयार करना होगा
अब हर बैंक को ऑन-पेपर, वेबसाइट और ऐप—हर जगह —
- लोन प्रोसेसिंग फीस
- एकाउंट चार्जेज
- सर्विस फीस
- ATM शुल्क
- पेनल्टी
सब कुछ एक ही स्टाइल में दिखाना होगा।









