
लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सच का सामना नहीं करना चाहते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर उन्हें सदन में बोलने से रोक रही है।
राहुल गांधी का कहना है कि प्रधानमंत्री को सांसदों से कोई डर नहीं है, बल्कि उस सच्चाई से डर है जिसे वे सदन में सामने रखना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार बहस और चर्चा से बच रही है, क्योंकि वह सवालों का जवाब नहीं देना चाहती।
“मुझे बार-बार सदन में बोलने से रोका गया”
राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि ऐसा एक-दो नहीं बल्कि तीन से चार बार हुआ। हर बार जब वे किसी अहम मुद्दे पर बोलने वाले थे, तब सदन की कार्यवाही रोक दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी सांसद पर प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है, तो सरकार को उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे साफ है कि लगाए जा रहे आरोप केवल चर्चा को दबाने के लिए हैं।
नरवणे की किताब पर चर्चा से बचने का आरोप
राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि इस किताब से जुड़े तथ्यों पर संसद में चर्चा हो। इसी कारण उन्हें बोलने से रोका गया और सदन की कार्यवाही बाधित की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री ने सदन में यह कहा कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि वास्तविकता यह है कि किताब छप चुकी है और विपक्ष के पास उसकी प्रति भी मौजूद है। राहुल गांधी के अनुसार यह मामला बेहद गंभीर है और इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।
“एक को बोलने की छूट, विपक्ष पर कार्रवाई”
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि सदन में एक सदस्य कई किताबों का हवाला देते हुए आपत्तिजनक बातें बोल रहा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, विपक्षी सांसदों को न सिर्फ चुप कराया गया बल्कि कुछ को निलंबित भी कर दिया गया।
राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि संसद में सभी को समान रूप से बोलने का अधिकार होना चाहिए।
“प्रधानमंत्री सदन में आने से कतराते रहे”
राहुल गांधी ने दावा किया कि यह गलत संदेश फैलाया जा रहा है कि सांसद प्रधानमंत्री के लिए खतरा थे। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं था। उनके अनुसार प्रधानमंत्री सदन में इसलिए नहीं आए क्योंकि वे उन सवालों और तथ्यों का सामना नहीं करना चाहते थे, जिन्हें वे उठाने वाले थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अब भी सच से दूरी बनाए हुए हैं और चर्चा से बच रहे हैं।
4 फरवरी को संसद में क्या हुआ था?
4 फरवरी को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष की महिला सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और बैनर के साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ने पर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इस हंगामे के कारण प्रधानमंत्री का प्रस्तावित भाषण भी टल गया। लोकसभा अध्यक्ष ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे संसदीय परंपराओं के लिए असामान्य बताया।










