
दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव, भारत रंग महोत्सव (भारंगम) का 25वां संस्करण 9 से 12 फरवरी तक Dada Lakhmi Chand State University of Performing and Visual Arts,(DLCSUPVA) में कराया जाएगा। DLCSUPVA स्थित एफटीवी विभाग के मिनी ऑडिटोरियम में चलने वाले इस महोत्सव में देश-विदेश की टीमें विभिन्न शैलियों और प्रदर्शन रूपों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशंसित रंगमंच प्रस्तुतियां देंगी। यह महोत्सव डीएलसीसुपवा के सहयोग से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) नई दिल्ली द्वारा कराया जा रहा है।
बुधवार को DLCSUPVA के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से खचाखच भरे हाल में 25वें भारत रंग महोत्सव का पोस्टर लॉन्च किया गया। इस दौरान DLCSUPVA के कुलगुरु डॉ अमित आर्य, रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा, ‘भारंगम’ के समन्वयक व एनएसडी से सीनियर एक्टिंग एक्सपर्ट प्रोफेसर सुमन वैद्य, एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन, डीएलसीसुपवा से महेश टीपी, केशव, डॉ अजय कौशिक आदि मौजूद रहे।
डॉ अमित आर्य ने दी जानकारी
DLCSUPVA के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने बताया कि 9 फरवरी को प्रज्ञा आर्ट्स थिएटर ग्रुप दिल्ली ‘उम्मीद–मनुष्य जिंदा है’ प्रस्तुत करेगा। इसके लेखक सच्चिदानंद जोशी व निर्देशक लक्ष्मी रावत हैं। 10 फरवरी को मंच रंगमंच अमृतसर, पंजाब ‘संदल बार’ का मंचन करेगा। इसके लेखक हरजीत सिंह व निर्देशक राहुल मालीवाल हैं। 11 फरवरी को केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा के प्रदर्शन और सुंदर कला विभाग द्वारा ‘उमर का परवाना’ की प्रस्तुति रहेगी। इसके लेखक विजयदान देथा व निर्देशक आदिश कुमार वर्मा हैं। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को अपूर्वा थिएटर ग्रुप श्रीलंका ‘कोलंबा हाथे थोरना’ प्रस्तुत करेगा, जिससे महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय रंग जुड़ जाएगा। इसके लेखक और निर्देशक चामिका हाथ्लाबथ्थुवा रहेंगे।
शहर के लिए गर्व का क्षण
हरियाणा में रंगमंच प्रेमियों को अपने संदेश में DLCSUPVA के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि हाल ही के विकास ने रोहतक व हरियाणा के रंगमंच और सांस्कृतिक परिदृश्य को भारत के सांस्कृतिक सर्किट में एक विशेष स्थान दिया है। रोहतक में ‘भारंगम’ की मेजबानी करना भारत में कला रूप के व्यापक कल्याण के लिए एक सार्थक प्रयास है और शहर के लिए गर्व का क्षण है। डीएलसीसुपवा राज्य की कला और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से गुणवत्ता और समावेशी रंगमंच को बढ़ावा देने में सुपवा को साथ जोड़ने पर हम एनएसडी का आभार प्रकट करते हैं।
महोत्सव सभी राज्यों में 41 स्थानों पर मनाया जा रहा है
डॉ अमित आर्य ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव ‘भारंगम’ ने देश भर में अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ी है। नागांव, रांची, रायपुर, गंगटोक, पारादीप, वाराणसी, बेंगलुरु, पटना, इटानगर, कोलकाता, इंफाल, साखालिन और दीमापुर में मंचन एक साथ आयोजित किए गए, जिससे थिएटर को विकेंद्रीकृत करके विश्व स्तरीय नाटकों को ज्यादा से ज्यादा कला प्रेमियों तक पहुंचाया गया। यह महोत्सव सभी राज्यों में 41 स्थानों पर मनाया जा रहा है, जिसमें हरियाणा से सिर्फ रोहतक का डीएलसीसुपवा शामिल है।
दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय नाट्य उत्सव
‘भारंगम’ के समन्वयक व एनएसडी से सीनियर एक्टिंग एक्सपर्ट प्रोफेसर सुमन वैद्य ने कहा कि 25वां भारत रंग महोत्सव, जिसे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा कराया जा रहा है, दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय नाट्य उत्सव है। 25वां संस्करण ‘भारंगम’ 27 जनवरी से 20 फरवरी तक 25 दिनों तक चलेगा, जिसमें 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रस्तुतियों का प्रदर्शन होगा, जिसमें कई अल्पप्रतिनिधित्व वाली भाषाएं भी शामिल हैं। यह महोत्सव राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रस्तुतियों का मिश्रण है, जिसमें 9 देशों व प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र की थिएटर समूहों की भागीदारी है।
प्रो सुमन वैद्य ने कहा कि भारत की रंगमंचीय विविधता का जश्न मनाते हुए ‘भारंगम’ में बच्चों के समूहों, आदिवासी समुदायों और वंचित वर्गों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जो एनएसडी की समावेशिता और रंगमंच के सार्वभौमिकरण की प्रतिबद्धता को साबित करता है।










