पोंगल अब सिर्फ त्योहार नहीं, एक वैश्विक उत्सव : PM MODI पोंगल और संक्रांति की दी शुभकामनाएं दी

Pongal has now become a global festival PM Modi
Pongal has now become a global festival PM Modi

Pongal has now become a global festival PM Modi, आज पोंगल केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। दुनिया भर में रहने वाले तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे पूरे उत्साह से मनाते हैं। मेरे लिए भी आप सभी के साथ इस पावन पर्व को मनाना सौभाग्य की बात है। पोंगल हमारे जीवन में खुशहाली, मेहनत और कृतज्ञता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अन्नदाता किसान, धरती माता और सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाता है।

प्रकृति, परिवार और समाज से जुड़ने का पर्व

पोंगल हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इसी समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू जैसे त्योहार भी मनाए जा रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। मैं भारत और दुनिया भर में रहने वाले सभी तमिल भाई-बहनों को पोंगल और सभी पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

तमिल संस्कृति से जुड़ाव की यादें

पिछला वर्ष मेरे लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि मुझे तमिल संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला। मैंने तमिलनाडु के हजार साल पुराने गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में पूजा की। वाराणसी में काशी तमिल संगमम् के दौरान मैंने सांस्कृतिक एकता की अद्भुत ऊर्जा को महसूस किया। रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के लोकार्पण के समय भी तमिल इतिहास और विरासत की महानता के दर्शन हुए। तमिल संस्कृति सिर्फ तमिलनाडु की नहीं, बल्कि पूरे भारत और मानवता की साझा विरासत है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को पोंगल जैसे पर्व और मजबूत करते हैं।

किसान: राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव

दुनिया की लगभग हर सभ्यता में फसल से जुड़ा कोई न कोई उत्सव होता है। तमिल संस्कृति में किसान को जीवन का आधार माना गया है। तिरुक्कुरल में कृषि और किसानों के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। हमारे किसान राष्ट्र निर्माण के मजबूत साथी हैं। उनके परिश्रम से आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिल रही है। केंद्र सरकार भी किसानों को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

पोंगल का संदेश: प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी

पोंगल हमें सिखाता है कि प्रकृति के प्रति आभार सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि जीवनशैली में दिखना चाहिए। धरती, पानी और संसाधनों को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। इसी सोच से मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम, और अमृत सरोवर जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।

सस्टेनेबल खेती की ओर भारत

सरकार खेती को ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल और सस्टेनेबल बनाने पर लगातार काम कर रही है। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, नेचुरल फार्मिंग, वाटर मैनेजमेंट, एग्रीटेक और वैल्यू एडिशन आने वाले समय में बेहद अहम हैं। इन क्षेत्रों में हमारे युवा नई सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में तमिलनाडु में नेचुरल फार्मिंग से जुड़े एक सम्मेलन में मैंने देखा कि कैसे कई युवा बड़ी-बड़ी नौकरियां छोड़कर खेती को अपना रहे हैं। मैं अपने तमिल युवा साथियों से आग्रह करता हूं कि वे सस्टेनेबल खेती की इस क्रांति को और आगे बढ़ाएं। हमारा लक्ष्य होना चाहिए—

थाली भी भरी रहे

जेब भी भरी रहे

और धरती भी सुरक्षित रहे

 तमिल संस्कृति से प्रेरित नया भारत

तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है। यह संस्कृति इतिहास से सीखकर वर्तमान को दिशा देती है। आज भारत भी अपनी जड़ों से शक्ति लेकर नए भविष्य की ओर बढ़ रहा है

पोंगल और संक्रांति के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज पोंगल और संक्रांति के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं। एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं!

पोंगल पर विश्वास और शुभकामनाएं

पोंगल के इस पावन अवसर पर हम उस विश्वास को महसूस करते हैं, जो भारत को आगे बढ़ा रहा है—एक ऐसा भारत जो अपनी संस्कृति से जुड़ा है, अपनी धरती का सम्मान करता है और भविष्य को लेकर आश्वस्त है।

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