
Now lifestyle has also been added to inflation, केंद्र सरकार ने देश में महंगाई मापने के पुराने पैमाने को बदल दिया है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) ने एक दशक बाद कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) की नई सीरीज जारी की है। नए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में रिटेल महंगाई दर 2.75% दर्ज की गई है। खास बात यह है कि अब महंगाई सिर्फ रसोई के खर्च से नहीं, बल्कि आपकी बदलती लाइफस्टाइल से भी तय होगी।
2024 बना नया बेस ईयर
सरकार ने महंगाई गणना का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। यानी अब कीमतों की तुलना 2024 के स्तर से की जाएगी।
नई सीरीज में सबसे बड़ा बदलाव ‘बास्केट ऑफ गुड्स’ में हुआ है। पहले CPI में 299 वस्तुएं शामिल थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़ाकर 350 से ज्यादा कर दी गई है।
अब सिर्फ दाल-चावल ही नहीं, बल्कि
- एयरपॉड्स
- पेट फूड
- सैनिटाइजर
- फिटनेस बैंड
- एयर प्यूरीफायर
जैसी आधुनिक जरूरतों को भी महंगाई की गणना में शामिल किया गया है।
खाने-पीने की चीजों का घटा वेटेज
नई CPI सीरीज में खाद्य वस्तुओं का वेटेज पहली बार 40% से नीचे आ गया है।
अब स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन और अन्य गैर-खाद्य श्रेणियों का हिस्सा बढ़कर 60% से अधिक हो गया है।
जनवरी 2026 महंगाई आंकड़े:
- ग्रामीण महंगाई दर: 2.73%
- शहरी महंगाई दर: 2.77%
- कुल खाद्य महंगाई: 2.13%
- ग्रामीण खाद्य महंगाई: 1.96%
इससे साफ है कि ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की चीजें शहरों के मुकाबले थोड़ी सस्ती रहीं।
हाउसिंग महंगाई दर भी बढ़ी
जनवरी 2026 में हाउसिंग महंगाई दर 2.05% रही।
- ग्रामीण हाउसिंग महंगाई: 2.39%
- शहरी हाउसिंग महंगाई: 1.92%
यह दिलचस्प है कि गांवों में घर से जुड़े खर्च शहरों की तुलना में ज्यादा बढ़े हैं।
पुराने और नए आंकड़ों में फर्क
पुराने फॉर्मूले के अनुसार दिसंबर 2025 में महंगाई दर 1.33% थी, लेकिन नए पैमाने पर यही आंकड़ा 2.75% दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई CPI सीरीज से सरकार और RBI को अर्थव्यवस्था की अधिक सटीक और वास्तविक तस्वीर मिलेगी।
आपकी जेब पर क्या असर होगा?
नई महंगाई गणना पद्धति से अब आपकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल, गैजेट्स और सेवाओं के खर्च भी महंगाई दर को प्रभावित करेंगे। इससे भविष्य में ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर असर पड़ सकता है, जो सीधे आपकी EMI और बचत से जुड़ा है।









