
लोकसभा में विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट, आरजेडी सहित कई विपक्षी दल शामिल हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पहल से दूरी बनाए रखी है।
कांग्रेस सांसदों ने सौंपा नोटिस
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के कार्यालय पहुंचे।
विपक्ष ने क्यों उठाया यह कदम?
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि स्पीकर पर सरकार का दबाव है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सदन में आकर जवाब देने से बचते रहे और इसी कारण स्पीकर को सफाई देनी पड़ी, जो सही नहीं है।
लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा की कार्यप्रणाली के नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने के लिए विशेष प्रक्रिया तय है।
- प्रस्ताव का नोटिस लिखित रूप में महासचिव को देना होता है
- आरोप स्पष्ट, तथ्यात्मक और गैर-अपमानजनक होने चाहिए
- प्रस्ताव को कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है
- नोटिस के 14 दिन बाद किसी भी दिन प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है
- चर्चा और वोटिंग आम तौर पर 10 दिनों के भीतर होती है
- प्रस्ताव पारित होने के लिए सदन के बहुमत की आवश्यकता होती है
- इस दौरान स्पीकर या डिप्टी स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते
क्या अविश्वास प्रस्ताव पास हो पाएगा?
हालांकि विपक्ष के पास प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत होने के कारण इस प्रस्ताव का पारित होना आसान नहीं माना जा रहा है।
बजट सत्र के दौरान हंगामा
इससे पहले बजट सत्र के 10वें दिन लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते सदन को पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से हाथ जोड़कर अपील की कि बजट पर चर्चा होने दी जाए, ताकि सदन का कामकाज सुचारु रूप से चल सके।









