सैम पित्रोदा का बड़ा बयान, राहुल गांधी की जासूसी कर रही मोदी सरकार, होटल, मीटिंग से लेकर एयरपोर्ट तक नज़र

Modi government is spying on Rahul Gandhi
Modi government is spying on Rahul Gandhi

Modi government is spying on Rahul Gandhi, राहुल गांधी पर नजर रखी जा रही है,  क्या देश के सबसे बड़े विपक्षी नेता की विदेश यात्रा भी अब निगरानी में है? क्या लोकतंत्र में असहमति जताना अब ‘संदेह’ की श्रेणी में आ गया है ? या फिर सैम पित्रोदा जैसे नेता सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी कर रहे हैं ? आज बात इस लेख में बात कर रहे हैं उस खुलासे की जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचाकर रख दी है।

विदेशी दौरों की हर गतिविधि पर सरकार की नजर

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और ओवरसीज़ कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने एक बड़ा दावा किया है कि राहुल गांधी जब भी विदेश के दौरे पर जाते हैं, भारतीय दूतावास के अधिकारी उनकी हर गतिविधि पर नज़र रखते हैं । होटल से लेकर एयरपोर्ट तक! इतना ही नहीं, पित्रोदा का तो यहां तक आरोप है कि भारतीय दूतावास के लोग कई बार विदेशी नेताओं को फोन करके कहते हैं “राहुल गांधी से मत मिलिए।”

राहुल गांधी के संपर्कों को सीमित करने की कोशिश

अब सवाल यह उठता है कि अगर सैम पित्रोदा का दावा सच है, तो क्या भारत सरकार विपक्षी नेताओं की जासूसी करवा रही है? अगर नहीं, तो सैम पित्रोदा ऐसा क्यों कह रहे हैं? और अगर यह बयान झूठ है, तो क्या यह भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला ‘पॉलिटिकल नैरेटिव’ है? सैम पित्रोदा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने खुद यह सब होते देखा है । राहुल गांधी के कार्यक्रमों पर नज़र रखी जाती है, उनकी मीटिंग्स पर रिपोर्टिंग होती है, और विदेश में उनके संपर्कों को सीमित करने की कोशिश होती है। हालांकि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि “अनुभव” के आधार पर यह बयान दे रहे हैं।

बीजेपी ने किया पलटवार राहुल को बताया “लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा

अब ज़रा सोचिए  क्या बिना सबूत के इतना बड़ा आरोप लगा देने को आप “अनुभव” कहेंगे या “राजनीतिक रणनीति”? अभी हाल ही में जर्मनी में राहुल गांधी ने बयान दिया था कि BJP भारतीय संविधान की उस मूल भावना को खत्म करना चाहती है, जो नागरिकों को समानता देती है। BJP राज्यों, भाषाओं और धर्मों की समानता के विचार पर प्रहार कर रही है।  राहुल गांधी के इस बयान के बाद BJP ने सीधा पलटवार किया था । शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी को “लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा” करार दिया और कहा कि वे हर बार विदेश जाकर भारत को बदनाम करते हैं। अब सवाल ये है कि सच में कौन भारत को बदनाम कर रहा है ? वो जो सवाल उठा रहा है या वो जो सवाल उठाने वाले की आवाज़ दबा रहा है ?

कांग्रेस देश की छवि को खराब कर रही है : BJP

ज़रा सोचिए अगर देश का विपक्षी नेता विदेश में जाकर लोकतंत्र, संस्थाओं और समानता पर बात करता है, तो क्या वह “भारत-विरोधी” हो जाता है? सैम पित्रोदा कहते हैं  “सच तो सच होता है, चाहे आप भारत में बोलें या विदेश में।” सुनने में यह लाइन बहुत सीधी लगती है, लेकिन इसका राजनीतिक अर्थ गहरा है ।  क्या सच्चाई अब ‘पता’ देखकर बदलेगी कि वह कहां बोली गई ? लेकिन यहां BJP का पक्ष भी सामने रखना ज़रूरी है। BJP का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस एक सुनियोजित तरीके से भारत की छवि खराब करने में जुटे हैं। BJP का आरोप है कि विदेशों में राहुल “भारत की नाक कटाने” वाले नेताओं के साथ मंच साझा करते हैं और विदेशी ताकतों को भारत के अंदरूनी मसलों में घुसने का मौका देते हैं । BJP नेताओं का यह भी कहना है कि राहुल की फंडिंग और मुलाकातों पर कई सवाल उठते हैं । हालांकि कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह बकवास बताती है ।

आखिर सच्चाई कौन बता रहा है? सत्ता पक्ष या विपक्ष?

सवाल यहां भी वही है  आखिर सच्चाई कौन बता रहा है? सत्ता पक्ष या विपक्ष? अगर दूतावास अधिकारी सच में राहुल गांधी की निगरानी कर रहे हैं, तो यह लोकतंत्र की सेहत के लिए खतरे की घंटी नहीं है? और अगर सैम पित्रोदा झूठ बोल रहे हैं, तो क्या यह भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली “फेंक स्टोरी” नहीं है?  क्या यह लोकतंत्र में “राजनीतिक निगरानी” का नया ट्रेंड है या सिर्फ एक “राजनीतिक चाल”?

भारत में लोकतंत्र के स्तंभ कमज़ोर हो रहे हैं : पित्रोदा

बता दें कि  सैम पित्रोदा ने इस इंटरव्यू में और भी कई संवेदनशील मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में संस्थाएं दबाव में हैं, चुनाव आयोग पर भरोसा कम हुआ है, और लोकतंत्र के स्तंभ कमज़ोर हो रहे हैं। उन्होंने अमेरिका, हंगरी, तुर्की जैसे देशों की मिसाल देते हुए कहा कि “ग्लोबल लेवल पर डेमोक्रेसी प्रेशर में है।” लेकिन क्या यह कहना सही है कि भारत की संस्थाएं दबाव में हैं? अगर हां, तो फिर जनता का जनादेश किस पर भरोसा करे? और अगर नहीं, तो ऐसे बयान देने का मकसद क्या? इसी इंटरव्यू में पित्रोदा ने मनरेगा की जगह लाए गए “जी-राम-जी” योजना पर भी सवाल उठाए । बोले कि गांधी के नाम की योजना में “राम” जोड़ने की ज़रूरत क्या थी? धर्म को शासन से जोड़ने की क्या ज़रूरत? यह बयान सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक समुदाय के नहीं, पूरे देश के होते हैं।

किसी भी तरह की हिंसा का समाज में कोई स्थान नहीं

यहां एक और दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी के नज़दीकी माने जाने वाले सैम पित्रोदा का यह बयान क्रिसमस के दौरान चर्चों पर हुए हमलों के संदर्भ में आया, जहां उन्होंने कहा कि “किसी भी तरह की हिंसा का समाज में कोई स्थान नहीं।” अब सवाल उठता है  क्या भारत वाकई उस रास्ते पर चल पड़ा है जहां असहमति को “एंटी-नेशनल” की श्रेणी में डाल दिया जाता है?  यह पूरा मामला सिर्फ राहुल गांधी या सैम पित्रोदा का नहीं है । यह उस सवाल का प्रतीक है जो हर लोकतांत्रिक समाज में उठना चाहिए ।

क्या सत्ता से सवाल पूछना गुनाह है

क्या सत्ता से सवाल पूछना गुनाह है? बीजेपी कहती है कि राहुल गांधी की राजनीति “अराजकता फैलाने की कोशिश” है  उनके बयान से देश में फूट बढ़ती है, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा गिरती है। बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने तो यहां तक कहा कि “राहुल गांधी भारत को असफल देखना चाहते हैं।” बड़ा गंभीर आरोप है… लेकिन सवाल फिर वही — कोई भी भारतीय चाहे वो किसी भी विचारधारा का हो, क्या सच में वह अपने देश को “असफल” देखना चाहेगा?

लोकतंत्र की असली परिभाषा क्या बचेगी

अगर विपक्षी नेता अब अपनी बात केवल “अपने देश के अंदर” ही कह सकते हैं और बाहर बोले तो ‘देशद्रोही’ कहलाएंगे, तो फिर लोकतंत्र की असली परिभाषा क्या बचेगी? और अगर विदेश मंत्रालय की निगरानी में विपक्ष को सिर्फ इसलिए रखा जा रहा है क्योंकि वे “सरकार की आलोचना” करते हैं, तो यह दौर किस दिशा में जा रहा है? पित्रोदा ने एक और बात कही जो गौर करने लायक है । उन्होंने कहा कि भारत अगर ‘विश्व गुरु’ बनना चाहता है, तो उसे पहले अपने पड़ोस में शांति और स्थिरता लानी होगी। बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसियों में।

वहीं BJP कहती है कि यह वही कांग्रेस है जो दशकों तक विदेश नीति को कमजोर करती रही । मतलब सीधा टकराव — एक पक्ष कहता है “भारत लोकतंत्र से दूर जा रहा है,” और दूसरा कहता है “कांग्रेस लोकतंत्र का बहाना बनाकर भारत की छवि बिगाड़ रही है।” क्या आप सैम पित्रोदा यह बयान सही है जिसमें उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के होटल, मीटिंग और एयरपोर्ट तक पर नज़र रखी जाती है? या यह सिर्फ सरकार को घेरने के लिए गढ़ी गई कहानी है? असली झूठ किसके पास है  पित्रोदा या सत्ता के गलियारों में? लोकतंत्र में सवाल पूछना तो क्या राहुल गांधी पर “निगरानी” वास्तव में भारत के लोकतंत्र पर सवाल नहीं?

Pradeep Dabas

Writer & Blogger

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • All Posts
  • Business
  • Comparison
  • Education
  • Entertainment
  • Food
  • Health & Fitness
  • Horoscope & Bhakti
  • International
  • Job
  • Lifestyle
  • News
  • Sports
  • Technology
  • World News
Heavy rain and hailstorm in Haryana

January 23, 2026

हरियाणा में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। प्रदेश के करीब 12 जिलों में तेज बारिश, कई इलाकों...

Shankaracharya Avimukteshwarananda's health deteriorates

January 23, 2026

प्रयागराज माघ मेले में बीते 5 दिनों से धरने पर बैठे ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई है। शिष्यों...

HINDUSTAN UDAY NEWS

Hindustan Uday News एक विश्वसनीय हिंदी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो राजनीति, देश-दुनिया, खेल, व्यवसाय और लाइफस्टाइल सहित सभी प्रमुख विषयों पर सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा खबरें पाठकों तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।

©2025 Created with Hindustan Uday News