
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई राजनीतिक दल असहमति के स्वर को स्वीकार नहीं कर सकता, तो यह उसके लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को शासन करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस में असहमति को लेकर उठाए सवाल
अपने हालिया बयान में अय्यर ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद असहमति पर टिकी होती है और विचारों की विविधता से ही संगठन मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व विरोध या अलग राय का सम्मान नहीं करता, तो यह मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि राहुल गांधी को उनके पिता राजीव गांधी के 1989 के उस बयान को दोहराना चाहिए, जिसमें उन्होंने धर्मनिरपेक्ष भारत की आवश्यकता पर जोर दिया था।
पिनराई विजयन की तारीफ के बाद बढ़ा विवाद
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अय्यर ने पिनराई विजयन की प्रशंसा की थी और उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उनके बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि उनका पार्टी से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
अय्यर ने अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में कहा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय पार्टी में अलग विचारों का सम्मान किया जाता था।
आपातकाल का उदाहरण देकर दी चेतावनी
अय्यर ने कहा कि जब इंदिरा गांधी के दौर में असहमति को दबाया गया और आपातकाल लगाया गया, तो कांग्रेस को चुनावी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे उदाहरण बताते हुए कहा कि पार्टी के भीतर विरोध को कुचलने से नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
असहमति को बताया लोकतंत्र की ताकत
पूर्व केंद्रीय मंत्री के अनुसार कांग्रेस एक विचारधारा है, जिसमें अलग-अलग विचारों और रास्तों के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई आवाजों के कारण ही पार्टी आगे बढ़ती है और मौजूदा नेतृत्व को इस सिद्धांत को याद रखना चाहिए।
राजीव गांधी के 1989 के बयान का जिक्र
अय्यर ने 5 मई 1989 को लोकसभा में दिए गए राजीव गांधी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल धर्मनिरपेक्ष भारत ही स्थायी रह सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या वे इस विचार को आज भी उतनी ही मजबूती से दोहरा सकते हैं। अपने वक्तव्य के अंत में अय्यर ने “राजीव गांधी अमर रहें” का नारा लगाते हुए अपनी बात समाप्त की।









