
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। शुरूआती जानकारी के अनुसार बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान प्लेन रनवे से उतर गया और उसमें आग लग गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई । विमान में अजित पवार के साथ उनके निजी सहायक, सुरक्षाकर्मी और विमान स्टाफ मौजूद थे।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हादसे में मौत की आधिकारिक पुष्टि की है। अजित पवार मुंबई से चार्टर्ड प्लेन के जरिए बारामती जा रहे थे । जहां उन्हें महाराष्ट्र गवर्नर जिला परिषद (डीजीसी) चुनाव प्रचार के सिलसिले में चार जनसभाओं को संबोधित करना था। हादसे की सूचना मिलते ही अजित पवार के परिजन उनके मुंबई स्थित आवास के लिए रवाना हो गए हैं।
दुर्घटना का जायजा लेने महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस बारामती पहुंचे। उन्होंने आज स्कूलों की छुट्टी और 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। पवार का अंतिम संस्कार बारामती में गुरुवार सुबह 11 बजे किया जाएगा। अजित के चाचा शरद पवार, पत्नी सुनेत्रा, दोनों बेटे और बहन सुप्रिया बारामती पहुंच गए हैं।
शरद पवार को कराया अस्पताल में भर्ती
मराठी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अजित पवार के चाचा शरद पवार को इस दुखद हादसे की सूचना देने में बेहद सतर्कता बरती गई । शरद पवार की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पहले उन्हें मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद, डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें अजित पवार के प्लेन क्रैश में मौत की खबर दी गई। यह सब इसलिए किया गाय शरद पवार को किसी तरह के सदमे से बचा जा सके।
मोदी ने अजीत पंवार के निधन पर जताया शोक
अजीत पंवार के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया जिसमें मोदी ने कहा किअजीत पवार जी जननेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर गहरा जुड़ाव था। महाराष्ट्र की जनता की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में उनका व्यापक सम्मान था। प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीबों एवं वंचितों को सशक्त बनाने का उनका जज़्बा भी सराहनीय था। उनका असामयिक निधन अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाला है। उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति हमारी संवेदनाएं। ओम शांति।
एक ऐसा नेता जो सत्ता से बाहर नहीं रहा
अजीत पंवार के निधन से एक राजनीतिक शून्य बन गया है क्योंकि अजीत पंवार की छवि एक ऐसे नेता की रही है। जो किसी न किसी रूप में राजनीति और सता का दामन थामे रहे उसके लिए चाहे कोई भी कदम उठाना पड़े । 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में जन्मे अजित पवार ने ग्रामीण भारत की वास्तविक चुनौतियों को बहुत करीब से देखा। खेती, पानी की किल्लत और किसानों की समस्याएं उनके जीवन का हिस्सा रहीं। उनके पिता अनंतराव पवार मुंबई के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। पिता की असमय मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी जल्दी आ गई, जिससे पढ़ाई सीमित रह गई। उन्होंने एसएससी (10वीं) तक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन हालात ने उन्हें जल्दी परिपक्व बना दिया।
राजनीति में एंट्री: विरासत नहीं, रणनीति
हालांकि शरद पवार उनके चाचा थे, लेकिन अजित पवार की राजनीति सिर्फ पारिवारिक विरासत पर नहीं टिकी। सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण ढांचे से जुड़े कामों ने उन्हें जमीनी नेता बनाया। वे शुरू से ही सत्ता के समीकरण समझने में माहिर माने गए।
मंत्रालय और सत्ता पर पकड़
अजित पवार ने अपने करियर में ऐसे विभाग संभाले जिनका सीधा असर जनता पर पड़ता है:
- कृषि और ऊर्जा
- जल संसाधन और सिंचाई
- ग्रामीण विकास और स्वच्छता
- वित्त और योजना
- उपमुख्यमंत्री के रूप में कई कार्यकाल
इन विभागों के जरिए उन्होंने खासतौर पर पानी और बिजली जैसे मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
2019: जब राजनीति ने करवट ली
2019 में अजित पवार ने वह कदम उठाया जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को हिला दिया। एनसीपी से अलग होकर उन्होंने बीजेपी के साथ सरकार बनाई और खुद उपमुख्यमंत्री बने। यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया कि अजित पवार जोखिम लेने से नहीं डरते। कुछ ही समय बाद वे फिर अपने चाचा के साथ लौटे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में अहम भूमिका निभाई।
2023और एनसीपी का विभाजन
जुलाई 2023 में इतिहास ने खुद को दोहराया। अजित पवार ने एक बार फिर अलग रास्ता चुना, जिससे एनसीपी दो हिस्सों में बंट गई। इस बार उन्होंने भाजपा और एकनाथ शिंदे की सरकार का साथ दिया और सत्ता में बने रहे।
2024 चुनाव: कमजोर नहीं, चुप खिलाड़ी
लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें कमजोर आंकना शुरू कर दिया। लेकिन विधानसभा चुनाव ने तस्वीर बदल दी। 41 सीटों की जीत के साथ उन्होंने दिखा दिया कि उनकी राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत है।
परिवार और निजी जीवन
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार हैं, जो पूर्व मंत्री पदमसिंह पाटिल की बेटी हैं। उनके दो बेटे हैं जय पवार, जो कारोबार से जुड़े हैं, पार्थ पवार, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा लेकिन 2019 में चुनाव हार गए। अजित पवार को पसंद किया जाए या नहीं, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है। सत्ता के बदलते खेल में टिके रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।
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