
India test-fires K-4 SLBM भारत अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बना रहा है। चीन और पाकिस्तान जैसे दो बड़े दुश्मनों से घिरे भारत के लिए किसी भी तरह की सुरक्षा चूक भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि देश की सुरक्षा रणनीति में अब कोई भी रिस्क नहीं लिया जा रहा। इसी कड़ी में भारत ने बिना किसी शोर-शराबे एक बड़ा और बेहद अहम सैन्य परीक्षण किया है, जिसकी गूंज दूर तक महसूस की जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने बंगाल की खाड़ी में समुद्र से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के साथ ही यह साफ हो गया है कि भारत अब जमीन, आसमान और समुद्र — तीनों मोर्चों से परमाणु हमला करने में सक्षम हो चुका है। यह भारत की न्यूक्लियर ट्रायड को पूरी तरह मजबूत करता है।
विशाखापट्टनम तट से जारी NOTAM से मिले संकेत
इस गुप्त परीक्षण से पहले विशाखापट्टनम तट से NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया गया था। इस नोटम का दायरा करीब 3240 किलोमीटर बताया गया है, जो इस परीक्षण के बड़े स्तर की ओर इशारा करता है।
हालांकि, इस मिसाइल टेस्ट को लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही इसकी रेंज और वैरिएंट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा: यह K-4 SLBM हो सकती है
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण K-4 SLBM मिसाइल का हो सकता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि मिसाइल को भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिघाट से लॉन्च किया गया हो। INS अरिघाट पूरी तरह से भारत में निर्मित परमाणु शक्ति संपन्न सबमरीन है।
कुछ रिपोर्ट्स में K-5 मिसाइल के अगली पीढ़ी के परीक्षण की भी चर्चा है, लेकिन ज्यादातर रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह टेस्ट K-4 मिसाइल का ही था। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गोपनीय परीक्षण 23 तारीख की सुबह को बंगाल की खाड़ी में किया गया।
SLBM टेस्टिंग प्रोग्राम को भारत ने दी नई धार
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने SLBM (Submarine Launched Ballistic Missile) परीक्षण कार्यक्रम को काफी तेज किया है। पिछले साल भी भारत ने बंगाल की खाड़ी में परमाणु-सक्षम K-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।
उस परीक्षण के साथ ही भारत ने Second Strike Capability हासिल कर ली थी, यानी यदि दुश्मन पहले हमला करता है, तो भी भारत जवाबी परमाणु हमला करने में पूरी तरह सक्षम है। इससे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक ताकत और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं।
K-4 SLBM की पूरी जानकारी
K-4 मिसाइल का पूरा नाम कलाम-4 है। यह भारत की स्वदेशी सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है, जिसे DRDO ने विकसित किया है।
यह मिसाइल अरिहंत-क्लास परमाणु पनडुब्बियों जैसे INS अरिहंत और INS अरिघाट से लॉन्च की जाती है
इसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है
यह रेंज पाकिस्तान और चीन के प्रमुख ठिकानों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त है
मिसाइल की लंबाई 12 मीटर, व्यास 1.3 मीटर और वजन करीब 17 टन है
यह 2 टन तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है
K-4 एक दो-स्टेज, ठोस ईंधन से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल है
अब तक के सफल परीक्षण
K-4 मिसाइल के अब तक कई सफल परीक्षण हो चुके हैं।
2020 में इसका अंतिम डेवलपमेंट परीक्षण सफल रहा था
नवंबर 2024 में INS अरिघाट से पहली बार पनडुब्बी से सफल लॉन्च किया गया
इसके बाद 23 दिसंबर को बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर गुप्त परीक्षण किया गया
भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और सेकेंड स्ट्राइक क्षमता और मजबूत
यह ताजा परीक्षण भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (Land, Air, Sea) को और अधिक सशक्त बनाता है। साथ ही भारत की Second Strike Capability को मजबूती मिलती है, जो किसी भी परमाणु हमले के खिलाफ सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानी जाती है।
इस परीक्षण के साथ भारत ने एक बार फिर यह साफ संदेश दे दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और हर मोर्चे पर भारत पूरी तरह तैयार है।









