
India can buy oil from Russia, America gives 30 days exemption, वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में बढ़ते तनाव के बीच United States ने India को रूस से तेल खरीदने के मामले में अस्थायी राहत दी है।
अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (Twitter) पर घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय भारतीय रिफाइनरियों को Russia से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे रहा है।
यह फैसला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और बाजार में अचानक पैदा हुए संकट को कम करने के लिए लिया गया है।
भारत पर पहले लगाया गया था 50% टैरिफ
अमेरिका ने इससे पहले रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।
- अमेरिका ने रूस से तेल आयात करने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था
- इसके बाद भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50% तक पहुंच गया था
बाद में Donald Trump ने घोषणा की कि भारत ने रूसी तेल आयात कम करने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया।
हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर भारत ने रूस से तेल आयात कम नहीं किया तो टैरिफ फिर से बढ़ाकर 25% किया जा सकता है।
अमेरिका ने 30 दिन की छूट क्यों दी?
अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent के अनुसार यह छूट कई कारणों से दी गई है:
- वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए
- पहले से समुद्र में मौजूद रूसी तेल सौदों को पूरा करने के लिए
- अचानक ऊर्जा संकट से बचने के लिए
उन्होंने कहा कि यह छूट जानबूझकर बहुत कम अवधि के लिए दी गई है ताकि इससे रूस को बड़ा आर्थिक लाभ न मिल सके।
साथ ही उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।
ईरान संकट से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा दबाव
वैश्विक ऊर्जा संकट की एक बड़ी वजह Iran से जुड़ा तनाव भी है।
अमेरिका और Israel द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz को बंद करने की धमकी दी थी।
यह समुद्री मार्ग इसलिए बेहद अहम है क्योंकि:
- दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई यहीं से गुजरती है
- भारत अपनी करीब 40% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से प्राप्त करता है
इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है।
भारत की क्या है आधिकारिक स्थिति?
भारत सरकार ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए उसे कई देशों से तेल खरीदना पड़ता है।
भारतीय रिफाइनरियां रूस से खरीदे गए कच्चे तेल को प्रोसेस करके कई देशों को निर्यात भी करती हैं।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
अमेरिका की इस घोषणा के बाद भारत में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता Kapil Sibal ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि:
“भारत लोकतंत्र की जननी है, लेकिन अमेरिका हमें 30 दिन के लिए तेल खरीदने की अनुमति दे रहा है।”
कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की स्थिति स्पष्ट करने के बजाय अमेरिका की ओर से यह स्पष्टीकरण आना शर्मनाक है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?
यह मामला सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- भारत-अमेरिका व्यापार संबंध
- वैश्विक ऊर्जा बाजार
- रूस-यूक्रेन युद्ध की कूटनीति
- मध्य पूर्व की भू-राजनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा वैश्विक ऊर्जा राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत, अमेरिका और वैश्विक राजनीति के बीच जटिल समीकरण बन गए हैं।
एक तरफ अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
अभी के लिए 30 दिन की छूट ने स्थिति को कुछ समय के लिए संभाल लिया है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा नीति और वैश्विक दबावों के बीच किस तरह संतुलन बनाता है।









