
भारत के लाखों घरों में इन दिनों एक ही सवाल घूम रहा है—अगर गैस सिलेंडर देर से मिला तो खाना कैसे बनेगा?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब सीधे भारतीय रसोई तक महसूस होने लगा है। कई शहरों में लोगों ने सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है, और इसका नतीजा यह हुआ कि अचानक इंडक्शन चूल्हों की मांग में भारी उछाल आ गया।
हालात ऐसे बन गए कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकटॉप “आउट ऑफ स्टॉक” दिखने लगे हैं।
क्यों बढ़ी गैस को लेकर चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव डाल दिया है। भारत अपनी बड़ी मात्रा में गैस और ऊर्जा आपूर्ति विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर यहाँ जल्दी दिखाई देता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस स्थिति के कारण कई जगह लंबी कतारें गैस एजेंसियों के बाहर दिखाई दीं और लोग सिलेंडर की बुकिंग को लेकर चिंतित दिखे।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस की सप्लाई जारी है और लोगों से घबराने की जरूरत नहीं है।
इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक क्यों बढ़ी?
गैस की अनिश्चितता की खबरों के बाद लोगों ने वैकल्पिक विकल्प तलाशने शुरू कर दिए।
सबसे आसान विकल्प बना इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकटॉप।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अचानक खरीदारी बढ़ गई
- कई मॉडल कुछ ही दिनों में खत्म हो गए
- इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स के अनुसार मांग कई गुना बढ़ी
कुछ रिटेल कंपनियों ने बताया कि इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में 3 से 4 गुना तक उछाल देखने को मिला है।
होटल, रेस्टोरेंट और कैंटीन पर ज्यादा असर
गैस संकट की आशंका का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर देखा जा रहा है।
- कई जगह कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी की शिकायत
- कुछ रेस्टोरेंट को मेन्यू कम करना पड़ा
- कुछ ने अस्थायी रूप से किचन बंद किए
दिल्ली और अन्य शहरों में कई रेस्टोरेंट्स ने बिजली से चलने वाले उपकरणों को बैकअप के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
रेल और छोटे व्यवसाय भी ढूंढ रहे विकल्प
कुछ जगहों पर पारंपरिक तरीके भी अपनाए जा रहे हैं।
रेलवे की कुछ किचन यूनिट्स ने गैस की कमी से निपटने के लिए लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि यात्रियों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो।
क्या आम लोगों को घबराने की जरूरत है?
सरकार और ऊर्जा मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि घबराकर ज्यादा खरीदारी या जमाखोरी न करें।
- घरेलू गैस सप्लाई जारी है
- उत्पादन बढ़ाने के कदम उठाए गए हैं
- प्राथमिकता घरेलू उपयोग को दी जा रही है
इसके बावजूद, खबरों और सोशल मीडिया की वजह से लोगों में चिंता बढ़ी है और यही वजह है कि वैकल्पिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी है।
आने वाले दिनों में क्या हो सकता है?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो:
- गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव
- वैकल्पिक कुकिंग तकनीकों की मांग बढ़ सकती है
- इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों का बाजार तेजी से बढ़ेगा
हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि घरेलू रसोई के लिए गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।








