
Food product approval rules tightened
नए साल के साथ खाद्य उद्योग के लिए नियम भी बदलने वाले हैं। अब बाजार में नया खाने-पीने का उत्पाद लॉन्च करना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने साफ कर दिया है कि किसी भी खाद्य उत्पाद की सुरक्षा, पोषण मूल्य और स्वास्थ्य संबंधी दावों के लिए कंपनियों को ठोस वैज्ञानिक प्रमाण देना अनिवार्य होगा । केवल वादों या ब्रांड दावों के आधार पर मंजूरी नहीं मिलेगी।
आवेदन केवल मानकीकृत प्रारूप में ही स्वीकार होंगे
FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने निर्देश जारी किए हैं कि खाद्य सुरक्षा समीक्षा और मानकों में बदलाव से जुड़े सभी आवेदन एक तय प्रारूप में ही स्वीकार किए जाएंगे। इसमें उत्पाद के तत्व, पोषण मूल्य, शेल्फ लाइफ और स्वास्थ्य दावा संबंधित प्रमाण शामिल करना होगा।
पुराने उत्पादों की दोबारा जांच नहीं, नियम केवल नए आवेदन पर लागू
नए नियमों के तहत बाजार में पहले से उपलब्ध उत्पादों की पुनः जांच नहीं की जाएगी। यह नियम तभी लागू होगा जब कोई हितधारक FSSAI से समीक्षा या नए उत्पाद की मंजूरी के लिए संपर्क करे। ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन अनिवार्य होगा।
पोषण और एलर्जी जोखिम की जानकारी देना अनिवार्य
नए फॉर्मेट के अनुसार, कंपनियों को उत्पाद में मौजूद पोषक तत्व, एलर्जी संभावनाएँ, सुरक्षा डेटा और अन्य तकनीकी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी। इन आंकड़ों की समीक्षा FSSAI के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ पैनल करेंगे, जो अंतिम निर्णय तय करेंगे।
भारतीय भोजन आदतों को ध्यान में रखकर निर्णय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा को मजबूत करेगा। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, झज्जर की आहार विशेषज्ञ अंजली भोला के अनुसार भारतीय खान-पान, मात्रा और संवेदनशीलता अन्य देशों से अलग है, इसलिए दीर्घकालिक प्रभाव और एलर्जी जोखिम पर आधारित प्रमाण मांगना आवश्यक है।
कंपनियों के दिए गए डेटा को गोपनीय रखा जाएगा
FSSAI ने आश्वासन दिया है कि जोखिम मूल्यांकन के लिए जमा किए गए सभी डेटा और अध्ययन गोपनीय रहेंगे। उनका उपयोग केवल वैज्ञानिक मूल्यांकन और नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में किया जाएगा।










