2 फरवरी 2026 : देश विदेश की 20 बड़ी खबरें

February 2, 2026: 20 big news from India and abroad
February 2, 2026: 20 big news from India and abroad

योगी सरकार का सख्त एक्शन, 68 हजार सरकारी कर्मचारियों की सैलरी रोकी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर लगातार सख्ती दिखा रही है। इसी क्रम में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए सरकार ने करीब 68 हजार सरकारी कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है। इन कर्मचारियों ने तय समय सीमा तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया था।

सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के तहत प्रदेश के 8,66,261 कर्मचारियों को वर्ष 2025 तक की संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य था। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 कर्मचारी समय पर जानकारी देने में विफल रहे। इसके बाद सरकार ने आदेश दिया कि जब तक संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया जाएगा, तब तक वेतन जारी नहीं होगा।

इन कर्मचारियों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी, 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और परिवहन जैसे प्रमुख विभागों के कर्मचारी इसमें शामिल हैं। अब इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस सख्ती के बाद कर्मचारी जल्द ही विवरण अपलोड करेंगे।
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मणिपुर में नई सरकार की अटकलें तेज

बीजेपी हाईकमान ने मणिपुर के सभी पार्टी विधायकों और एनडीए के सहयोगी दलों के विधायकों को तत्काल विचार-विमर्श के लिए दिल्ली बुलाया है। 31 जनवरी को जारी निर्देश के मुताबिक सभी विधायकों को 2 फरवरी दोपहर 2 बजे तक राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने को कहा गया है, जबकि कई विधायक 1 फरवरी को ही दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। इस कदम के बाद मणिपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है, जब राज्य में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है और विधानसभा निलंबित अवस्था में है। 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन के एक साल पूरे होने से पहले इस बुलावे को बेहद अहम माना जा रहा है।

हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर बीजेपी नेतृत्व ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह संदेश प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के जरिए भेजा गया, जबकि पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा ने विधायकों से व्यक्तिगत संपर्क किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले सरकार गठन की आखिरी कोशिश की जा रही है और अगले एक हफ्ते में मणिपुर को नई सरकार मिल सकती है।

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आम बजट 2026 पर चिदंबरम बोले—आर्थिक रणनीति और नेतृत्व दोनों विफल

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट 2026 को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस सांसद और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि जिसने भी इसे सुना, वह हैरान रह गया। बजट के बाद पी. चिदंबरम और जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला।

चिदंबरम ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का बयान नहीं होता, बल्कि मौजूदा चुनौतियों पर स्पष्ट दृष्टिकोण देना चाहिए था, जिनका जिक्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सर्वेक्षण की अनदेखी की और केवल शब्दों व एक्रोनीम्स की बौछार की।

उन्होंने 10 बड़ी चुनौतियां गिनाईं, जिनमें बढ़ता व्यापार घाटा, निवेश की कमी, एफडीआई-एफपीआई में गिरावट, ऊंचा राजकोषीय घाटा, महंगाई, MSMEs का संकट, बेरोजगारी और शहरी ढांचे की बदहाली शामिल हैं। चिदंबरम ने कहा कि बजट में इन मुद्दों पर कोई ठोस जवाब नहीं है।

उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल जीवन मिशन जैसे क्षेत्रों में भारी कटौती का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट आर्थिक रणनीति और “इकोनॉमिक स्टेट्समैनशिप” की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

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आम बजट 2026 पर मायावती का तंज, पूछा—गरीबों को कितनी राहत?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026 को लेकर विपक्ष का हमला तेज हो गया है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी बजट पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीयत पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का बजट सत्ताधारी दल की नीति और सोच का आईना होता है, जिससे साफ झलकता है कि सरकार गरीब-बहुजन हितैषी है या फिर बड़े पूंजीपतियों के हितों की पोषक।

मायावती ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह बजट आम गरीब जनता को कितनी वास्तविक राहत देगा। केवल बड़ी-बड़ी योजनाओं और वादों की बातें काफी नहीं हैं, जरूरी है कि उन पर सही नीयत से अमल भी हो।

उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान का हवाला देते हुए सवाल किया कि आत्मनिर्भर भारत के नाम पर सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है। साथ ही पिछले साल के बजट में किए गए वादों की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या उनसे आम लोगों के जीवन में कोई ठोस बदलाव आया है या नहीं।

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केंद्रीय बजट 2026 पर नीतीश कुमार की मुहर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय बजट 2026 की सराहना करते हुए इसे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह बजट प्रगतिशील और भविष्योन्मुखी है, जिससे देश के विकास की गति तेज होगी।

नीतीश कुमार ने कहा कि बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा अहम है। वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बिहार को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा के तहत पटना और वाराणसी में जहाज मरम्मत सुविधाएं मिलने से बिहार के उत्पादों के निर्यात और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

सीएम ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क, महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रुपये के समर्थन से बिहार सहित देशभर के युवाओं को रोजगार मिलेगा। पूर्वोदय राज्यों पर विशेष फोकस, शहरी विकास और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल की घोषणा को उन्होंने बिहार के लिए लाभकारी बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद किया।

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असम चुनाव से पहले हेमंत सोरेन की एंट्री, हिमंत सरमा पर साधा बड़ा निशाना

असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को तिनसुकिया पहुंचे, जहां उन्होंने आदिवासी महासभा को संबोधित करते हुए असम सरकार पर तीखा हमला बोला। बिना नाम लिए उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर प्रवासी आदिवासियों के साथ भेदभाव और आदिवासी समाज को एसटी-टी ट्राइब के नाम पर बांटने का आरोप लगाया।

हेमंत सोरेन ने कहा कि आने वाले चुनाव में जनता पांच साल का हिसाब लेगी और एसआईआर के नाम पर “वोट डकैती” हो रही है। उन्होंने महंगाई, नोटबंदी, जीएसटी और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि रुपये की कीमत गिर रही है और आम जनता पर आर्थिक मार पड़ रही है।

सभा के अंत में समर्थकों ने “हेमंत सोरेन जिंदाबाद” के नारे लगाए। माना जा रहा है कि जेएमएम इस साल के अंत में होने वाले असम विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतार सकती है।

सोनम वांगचुक की NSA हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सोमवार को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने दायर की है। संभावना है कि मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ करेगी।

जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद वांगचुक ने 29 जनवरी को उन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ की तर्ज पर सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि आलोचना और विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

वांगचुक की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि पुलिस ने हिरासत के लिए अधिकारियों को गुमराह करने हेतु चुनिंदा वीडियो फुटेज का इस्तेमाल किया। आंगमो ने हिरासत को अवैध और मनमाना बताते हुए इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कहा है।

यह मामला 26 सितंबर को लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है, जिनमें चार लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए थे।

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बजट 2026 पर राकेश टिकैत बोले किसान खाली हाथ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक बताया है, लेकिन विपक्ष के साथ-साथ किसान संगठनों ने इसे निराशाजनक करार दिया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बजट को किसान, मजदूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाला बताया।

राकेश टिकैत ने कहा कि बढ़ती महंगाई, खेती की बढ़ती लागत, कर्ज के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न कर्ज माफी का कोई ठोस प्रावधान है और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने की पहल। उन्होंने कहा कि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वे पूरी नहीं हुईं।

टिकैत ने ग्रामीण रोजगार और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी बजट को कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं को मजबूत करने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखती। साथ ही आदिवासी समाज के जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों को भी नजरअंदाज किया गया है। उनका आरोप है कि बजट का झुकाव ग्रामीण भारत के बजाय शहरी और कॉरपोरेट हितों की ओर है।

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बजट 2026 भविष्य का ब्लूप्रिंट : ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आम बजट 2026 को भारत के भविष्य का बजट बताते हुए इसे विकास का स्पष्ट ब्लूप्रिंट करार दिया है। TV9 भारतवर्ष से बातचीत में उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर तीखा तंज भी कसा। सिंधिया ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा को और सशक्त करता है। उन्होंने दावा किया कि देश 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रहा है और महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है, जो 9 महीनों में घटकर 1.7 प्रतिशत तक आ गई है।

सिंधिया ने बताया कि 2014-15 में जहां कैपिटल एक्सपेंडिचर 2 लाख करोड़ था, वहीं अब यह 11 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और जल्द ही 12 लाख करोड़ होगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ समावेशी बजट नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का दस्तावेज है, जिसमें ऑरेंज इकोनॉमी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन और पूर्वोत्तर भारत पर विशेष फोकस किया गया है।

विपक्ष पर हमला बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि उन्हें देश की चिंता नहीं, छुट्टी की चिंता है, जबकि यह बजट भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने वाला साबित होगा।

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राखीगढ़ी देश की 15 आइकॉनिक साइट्स में शामिल

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए हरियाणा को बड़ी सौगात दी है। बजट भाषण के दौरान उन्होंने हरियाणा के राखीगढ़ी को देश की 15 आइकॉनिक साइट्स में शामिल करने की घोषणा की। इस फैसले से दुनिया की सबसे पुरानी और विशालकाय सिंधु-सरस्वती सभ्यता के केंद्र राखीगढ़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि राखीगढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पर्यटकों के लिए पाथवे बनाए जाएंगे, स्थानीय गाइड नियुक्त किए जाएंगे और ऐतिहासिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

राखीगढ़ी करीब 6,000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख स्थल है, जहां खुदाई में प्राचीन बर्तन, कंकाल, आभूषण, लिपि और उन्नत ड्रेनेज सिस्टम मिले हैं। बजट में राज्यों को अतिरिक्त कर हिस्सेदारी देने के फैसले से हरियाणा को भी शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।

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द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में एआर रहमान की मौजूदगी पर विवाद

ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान हाल के दिनों में अपने संगीत से ज्यादा एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पिछले आठ सालों से उन्हें बॉलीवुड में अपेक्षित काम नहीं मिला, जिसके पीछे सांप्रदायिक कारण हो सकते हैं। इस बयान के बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और विवाद अभी भी जारी है।

इसी बीच ए आर रहमान की ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में मौजूदगी पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने कड़ी आपत्ति जताई है। राणे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रहमान के कुछ बयानों से समाज के एक बड़े वर्ग, खासकर हिंदू समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, ऐसे में उन्हें इतने बड़े मंच पर बुलाने से पहले सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

नितेश राणे ने कहा कि मनोरंजन की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन जनभावना, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता से समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने नेटफ्लिक्स और शो निर्माताओं से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

विवाद बढ़ने पर ए आर रहमान ने सफाई देते हुए कहा कि भारत उनके लिए सिर्फ देश नहीं बल्कि प्रेरणा है और उनका उद्देश्य कभी किसी की भावनाएं आहत करना नहीं रहा।

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सबरीमाला चोरी मामला: मुख्य आरोपी जमानत के लिए कोर्ट का रुख किया

सबरीमाला सोना चोरी मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने अपने खिलाफ दर्ज दूसरे मामले में वैधानिक जमानत की मांग करते हुए केरल के कोल्लम स्थित विजलेंस कोर्ट में याचिका दायर की है। पोट्टी को इससे पहले द्वारपालक की मूर्तियों की थालियों से सोना चोरी के मामले में जमानत मिल चुकी है। अब उन्होंने श्रीकोविल के दरवाजों के फ्रेम से सोना चोरी से जुड़े मामले में राहत की गुहार लगाई है।

पोट्टी ने शनिवार को यह याचिका दायर की, क्योंकि गिरफ्तारी के 90 दिन बीत जाने के बावजूद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी है। अदालत ने याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। पुलिस के अनुसार, यदि जमानत मिलती है तो पोट्टी की जेल से रिहाई संभव है।

एसआईटी के मुताबिक, 2019 में सोने की इलेक्ट्रोप्लेटिंग की प्रक्रिया के दौरान ही सोने के नुकसान की आशंका है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट लंबित होने के कारण आरोपपत्र दाखिल करने में देरी हुई है। एसआईटी इसी महीने आरोपपत्र दाखिल करने का दावा कर रही है।

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माघ पूर्णिमा पर ददरी घाट में बड़ा हादसा टला

गाजीपुर शहर के ददरी घाट पर माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर गंगा स्नान के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया। स्नान करते समय गहरे पानी में डूब रहे एक पति-पत्नी को पीएसी की फ्लड यूनिट और स्थानीय गोताखोरों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

यह घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के बड़ी बाग निवासी सुषमा ओझा और उनके पति अमर ओझा के साथ हुई। दोनों गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक सुषमा ओझा का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गईं। पत्नी को डूबता देख अमर ओझा भी उन्हें बचाने के लिए गंगा में कूद पड़े, लेकिन तेज बहाव के कारण दोनों डूबने लगे। घाट पर अफरा-तफरी मच गई।

मौके पर तैनात 34वीं वाहिनी पीएसी की 13वीं फ्लड टीम ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया। स्थानीय नाविकों और गोताखोरों की मदद से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू के बाद श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली। सुषमा ओझा ने भावुक होकर पीएसी जवानों और गोताखोरों का आभार जताया।

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भारत ने बांग्लादेश और ईरान के लिए विदेश मदद में कटौती

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का आम बजट पेश किया, जिसमें विदेश मंत्रालय के तहत विदेशों में वित्तीय मदद में बदलाव किए गए हैं। बांग्लादेश के लिए मदद 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कोई एलोकेशन नहीं दी गई।

कुल बजट एलोकेशन 5,686 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल के बजट अनुमान से लगभग 4% अधिक है, लेकिन रिवाइज्ड एस्टिमेट 5,785 करोड़ से कम है। पड़ोसी देशों में भूटान को सबसे अधिक 2,289 करोड़ रुपये दी जा रही है, नेपाल का एलोकेशन 800 करोड़ और श्रीलंका की मदद 400 करोड़ रुपये तक बढ़ाई गई है।

मालदीव की मदद घटाकर 550 करोड़, म्यांमार की 300 करोड़ और यूरेशियन देशों के लिए 38 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। अफ्रीकी देशों को 225 करोड़ रुपये और लैटिन अमेरिका को 120 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है।

ये बदलाव भारत की “नेबरहुड-फर्स्ट” नीति और बदलती जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों को दर्शाते हैं, जिसमें कुछ देशों को प्राथमिकता दी गई और कुछ पर कटौती की गई है। 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय का कुल खर्च 22,119 करोड़ रुपये अनुमानित है।

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लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहस

लोकसभा में सोमवार, 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस शुरू होगी, जो तीन दिन तक चलेगी। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाली इस चर्चा में बीजेपी की तरफ से सर्वानंद सोनोवाल और तेजस्वी सूर्या बोलेंगे। कुल 18 घंटे के लिए निर्धारित इस बहस में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी अपना पक्ष रख सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी 4 फरवरी को लोकसभा में और 5 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देंगे।

राज्यसभा में 2 फरवरी को दोपहर 2 बजे चर्चा शुरू होगी। बीजेपी की तरफ से सदानंद मास्टर और मेघा विश्राम कुलकर्णी बोलेंगी, जबकि जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी समेत कई नेता पार्टी की ओर से हिस्सा लेंगे।

केंद्रीय बजट 2026-27 पर आम चर्चा 5, 9, 10 और 11 फरवरी को होगी। विपक्षी दल एमजीएनआरईजीए की बहाली, एसआईआर और यूजीसी विवाद सहित कई मुद्दे उठाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस के कई नेता बहस में बोलना चाहते हैं, लेकिन समय के अनुसार नाम शॉर्टलिस्ट किए जाएंगे।

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बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी को बागी उम्मीदवारों की चुनौती

17 साल बाद बांग्लादेश की BNP की चेयरपर्सन तारिक रहमान की वापसी हुई है, लेकिन सत्ता हासिल करना उनके लिए आसान नहीं है। 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में BNP ने 291 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं, लेकिन पार्टी के फैसले के खिलाफ 79 सीटों पर कुल 92 बागी उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से कम से कम 46 सीटों पर बागियों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बागी उम्मीदवारों के कारण BNP के वोट बंट सकते हैं, जिससे जमात-ए-इस्लामी और उसके समर्थित उम्मीदवारों को फायदा होने की संभावना बढ़ रही है। पार्टी ने कई बागियों को अनुशासन तोड़ने के आरोप में निकाल दिया और लोकल कमेटियों को भंग किया, फिर भी उम्मीदवार चुनाव मैदान नहीं छोड़ रहे हैं।

बीएनपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा बागियों के लिए कैंपेन कर रहा है, जबकि कुछ समर्थक अपनी नाराजगी के चलते पार्टी के उम्मीदवारों के लिए सहयोग नहीं कर रहे। इस स्थिति से BNP की संगठनात्मक कमजोरी सामने आ रही है और चुनाव परिणाम पर इसका असर पड़ने की संभावना है।

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भारत अब ईरान की बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा ट्रंप का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब ईरान की बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। हालांकि भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वेनेजुएला का तेल ओरिनोको बेल्ट से आता है और हेवी, सॉर क्रूड होता है। इसका API ग्रेविटी 20 से कम है, यानी तेल गाढ़ा और अम्लीय है। इस वजह से इसे रिफाइन करना महंगा और मुश्किल होता है, साथ ही स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट में जंग का खतरा भी बढ़ जाता है। वेनेजुएला का क्रूड आमतौर पर ब्रेंट से 8-15 डॉलर प्रति बैरल सस्ता बिकता है।

वहीं, ईरान का तेल हल्का और मीडियम ग्रेड है, API ग्रेविटी 29-34 के बीच। इसे निकालना और रिफाइन करना आसान है, और भारत की अधिकांश रिफाइनरियां इसे पहले से प्रोसेस कर सकती हैं।

भारत के लिए वेनेजुएला से तेल आयात करने में बड़ी छूट मिलने पर फायदा हो सकता है, लेकिन ज्यादा रिफाइनिंग, लॉजिस्टिक खर्च और जंग जैसी चुनौतियां भी बनी रहेंगी।

अमेरिकी विदेश नीति पर जेफरी की खुली आलोचना: “ग्लोबल गैंगस्टर्स”

अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी ने अमेरिका की विदेश नीति की तीखी आलोचना करते हुए इसे “गैंगेस्टर की तरह” बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में सत्ता बदलने, एकतरफा प्रतिबंध और हथियार के रूप में वित्तीय दबाव का प्रयोग कर रहा है। उनका मानना है कि दुनिया, विशेषकर भारत और BRICS देशों को इस रवैये का विरोध करना चाहिए।

उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र कमजोर हो गया है क्योंकि बड़ी ताकतें अमेरिका की मनमानी का सामना करने में नाकाम रही हैं। उन्होंने BRICS से तीन सुझाव दिए: अमेरिका की नीतियों की निंदा, भारत और ब्राजील के लिए UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों का समर्थन, और क्वाड से दूरी बनाना ताकि अमेरिका चीन विरोधी रणनीतियों में भारत का इस्तेमाल न कर सके। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को अमेरिका की खुली “गुंडागर्दी” बताया और दुनिया से एकजुट होकर UN के सिद्धांतों के तहत इसका मुकाबला करने की अपील की।

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ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध को बढ़ा सकता है : खामेनेई

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष को जन्म देगा। खामेनेई ने कहा कि ईरान किसी भी देश से हमले का करारा जवाब देगा, लेकिन वह उकसाने वाला नहीं है। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर हमले की धमकियों के बीच आया है।

ईरान में पिछले एक महीने से भारी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनकी शुरुआत महंगाई और करेंसी गिरावट के मुद्दे से हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के प्रदर्शनकारियों के समर्थन के ऐलान ने तनाव को और बढ़ा दिया।

साथ ही, ईरान के सुप्रीम लीडर ने इस्लामिक क्रांति की 47वीं वर्षगांठ का जश्न भी घोषित किया। अमेरिका के दर्जनों जंगी जहाज अरब सागर में ईरान के पास तैनात हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव किसी भी समय क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।

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RIC फोरम की वापसी की कोशिश, लेकिन भारत क्यों है असमंजस में?

रूस, भारत और चीन का त्रिपक्षीय फोरम RIC एक बार फिर चर्चा में है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दिल्ली और बीजिंग के साथ RIC बातचीत दोबारा शुरू करने की अपील की है। यह फोरम पहली बार 1998 में प्रस्तावित हुआ था, लेकिन भारत-चीन तनाव के कारण सक्रिय नहीं हो पाया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की झिझक की बड़ी वजह चीन के साथ सीमा विवाद और 2020 की गलवान झड़प के बाद भरोसे की कमी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की मदद और भारत के खिलाफ गलत सूचना अभियान ने भी भारत की चिंता बढ़ाई है।

तक्षशिला इंस्टीट्यूशन की अनुष्का सक्सेना के अनुसार, भारत RIC को अमेरिका-पश्चिम विरोधी मंच के रूप में नहीं देखना चाहता। वह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में विश्वास करता है। विश्लेषकों का मानना है कि RIC से सबसे ज्यादा फायदा रूस को होगा, जो अंतरराष्ट्रीय अलगाव से निकलने और वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देना चाहता है। भारत फिलहाल किसी अंतिम फैसले से पहले अमेरिका की नीति पर नजर बनाए हुए है।

HIndustan Uday News

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