महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 : शहरी सत्ता पर महायुति का कब्जा, बीजेपी सबसे बड़ी ताकत, ठाकरे युग का अंत

End of Thackeray era in BMC elections
End of Thackeray era in BMC elections

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों ने राज्य की शहरी राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका से लेकर पुणे, नागपुर, नासिक और ठाणे तक, भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र अब पूरी तरह उनके पाले में चला गया है। इन चुनावों को राजनीतिक विश्लेषक 2029 विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल मान रहे हैं।

बीएमसी में ऐतिहासिक बदलाव

बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनावों में महायुति गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए एशिया के सबसे समृद्ध नगर निकाय पर वर्षों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व समाप्त कर दिया है। इस जीत के साथ ही मुंबई को लंबे समय बाद बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का महापौर मिलने जा रहा है।

बीएमसी सीटों का पूरा गणित

बीएमसी के 227 वार्डों में हुए चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 89 सीटों पर जीत हासिल की, जो 2017 के चुनाव में मिली उसकी अब तक की सर्वश्रेष्ठ 82 सीटों से भी अधिक है। वहीं सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 29 सीटें जीतकर गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिलाया। इस तरह महायुति की कुल सीटें 118 हो गईं, जबकि बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 114 है।

ठाकरे परिवार के गढ़ में बड़ी सेंध

एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर बीजेपी ने इस बार ठाकरे परिवार के सबसे मजबूत किले में सेंध लगा दी। वर्षों से बीएमसी पर शासन कर रही शिवसेना (अविभाजित) का यह प्रभुत्व अब समाप्त हो गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन को कुल 72 सीटों से संतोष करना पड़ा।

1997 से चला आ रहा था शिवसेना का शासन

गौरतलब है कि अविभाजित शिवसेना 1997 से लगातार बीएमसी की सत्ता में रही थी। इस चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं, जबकि राज ठाकरे की मनसे को 6 और एनसीपी (शरद पवार) को 1 सीट पर जीत मिली। इसके अलावा कांग्रेस ने 24 सीटें, AIMIM ने 8 सीटें, एनसीपी (अजित पवार) ने 3 सीटें और समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीतीं। दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी रहे।

प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीएमसी चुनाव में एनडीए को समर्थन देने के लिए मुंबई की जनता का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि एनडीए को आशीर्वाद देने के लिए वे मुंबई के भाई-बहनों के अत्यंत आभारी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई देश का गौरव है—सपनों का शहर और भारत के विकास को गति देने वाला महानगर। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसी भावना के साथ शहर को सुशासन और बेहतर जीवन-सुविधाएं दी जाएंगी।

मतदान प्रतिशत और बीएमसी का बजट

227 सदस्यीय बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये है। मुंबई समेत 28 अन्य नगर निकायों में हुए इन चुनावों में कुल 54.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

ठाणे में शिंदे गुट की सियासी मजबूती

ठाणे महानगर पालिका में भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपनी पकड़ मजबूत साबित की। कुल 131 सीटों वाले ठाणे निगम में शिंदे गुट को 71 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी ने 28 सीटें जीतीं। इस तरह महायुति गठबंधन यहां भी स्पष्ट बहुमत की स्थिति में पहुंच गया। एनसीपी और कांग्रेस जैसे दल यहां हाशिये पर सिमटते नजर आए। ठाणे की जीत को शिंदे गुट के लिए उनकी राजनीतिक वैधता की सबसे बड़ी पुष्टि माना जा रहा है।

पुणे में बीजेपी का दबदबा

पुणे महानगर पालिका में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 165 में से 91 सीटें जीत लीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अजित पवार गुट की एनसीपी को 14, कांग्रेस को 10 और अन्य दलों को सीमित सीटें मिलीं। पुणे में बीजेपी की जीत ने यह साबित कर दिया कि शहरी मध्यम वर्ग और आईटी सेक्टर का भरोसा अभी भी पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।

नागपुर में फडणवीस का किला अडिग

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की। 151 सीटों वाले नागपुर महानगर पालिका चुनाव में बीजेपी ने 102 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 34 और AIMIM को 6 सीटें मिलीं। नागपुर एक बार फिर बीजेपी का अभेद्य किला साबित हुआ।

नासिक में भी बीजेपी का स्पष्ट बहुमत

नासिक महानगर पालिका में भी बीजेपी का दबदबा देखने को मिला। 121 सीटों वाले नासिक निगम में बीजेपी ने 76 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 और शिवसेना (यूबीटी) को 9 सीटें मिलीं। कांग्रेस और एनसीपी यहां बेहद कमजोर स्थिति में नजर आईं।

नवी मुंबई और पिंपरी-चिंचवड़ में एकतरफा परिणाम

नवी मुंबई महानगर पालिका में 111 सीटों में से बीजेपी ने 66 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 42 सीटें जीतकर महायुति को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। शिवसेना (उद्धव गुट) यहां सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई। इसी तरह पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में 128 सीटों में से बीजेपी ने 85 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि अजित पवार गुट की एनसीपी को 36 सीटें मिलीं।

मराठवाड़ा और विदर्भ में भी महायुति का प्रभाव

छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में महायुति गठबंधन सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। यहां AIMIM ने कुछ इलाकों में प्रभाव जरूर दिखाया, लेकिन सत्ता की चाबी बीजेपी और शिंदे गुट के पास रही। अमरावती महानगर पालिका में भी बीजेपी ने बढ़त हासिल करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा पाया, जबकि सोलापुर नगर निगम में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।

कांग्रेस के गढ़ों में भी बदलाव

कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माने जाने वाले कोल्हापुर में भी इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। यहां कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को झटका लगा और महायुति गठबंधन सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। अकोला, लातूर और नांदेड़ जैसे मराठवाड़ा और विदर्भ के अहम नगर निगमों में भी बीजेपी, शिंदे शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी ने मिलकर ज्यादातर जगहों पर जीत या निर्णायक बढ़त हासिल की।

राज्य स्तर पर सीटों की तस्वीर

राज्य-स्तर पर देखें तो कुल 2,800 से अधिक घोषित सीटों में बीजेपी ने अकेले लगभग 1,370 से ज्यादा सीटें जीतकर खुद को महाराष्ट्र की सबसे बड़ी शहरी पार्टी के रूप में स्थापित कर लिया है। शिवसेना (शिंदे गुट) को करीब 400 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस लगभग 320 और शिवसेना (उद्धव गुट) करीब 150 सीटों तक सिमट गई। एनसीपी (शरद पवार) का प्रदर्शन भी सीमित रहा, जबकि AIMIM और कुछ छोटे दलों ने चुनिंदा इलाकों में प्रभाव दिखाया।

फडणवीस फैक्टर और मोदी ब्रांड

इन नतीजों के पीछे सबसे बड़ा चेहरा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के रूप में उभरा है। संगठनात्मक मजबूती, शहरी विकास का एजेंडा, केंद्र-राज्य तालमेल और मोदी ब्रांड ने बीजेपी को निर्णायक बढ़त दिलाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम चुनावों के ये नतीजे आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

निष्कर्ष: शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का नया केंद्र

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का केंद्र पूरी तरह बदल चुका है और महायुति गठबंधन अब निर्णायक ताकत बन चुका है।

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