
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कथित अपमान के मामले में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री पर राज्य सरकार ने कार्रवाई की है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं।
इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं, जांच के बाद होगा फैसला
हालांकि, अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा फिलहाल मंजूर नहीं किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सरकार उनके त्यागपत्र पर अंतिम निर्णय लेगी।
शामली अटैच किए गए अधिकारी, कमिश्नर को जांच की जिम्मेदारी
निलंबन के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री को शामली जिले से अटैच कर दिया गया है। बरेली मंडल के कमिश्नर को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है, जो अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
देर रात शंकराचार्य से फोन पर हुई बातचीत
निलंबन की कार्रवाई के बीच देर रात शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस दौरान शंकराचार्य ने उनके फैसले की सराहना की।
शंकराचार्य का बयान: सनातनी समाज आपसे प्रसन्न है
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री के कदम से पूरा सनातनी समाज संतुष्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जो पद उन्हें दिया था, उससे कहीं बड़ा पद उन्हें धर्म के क्षेत्र में दिया जाएगा।
गणतंत्र दिवस पर दिया था इस्तीफा
अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके पीछे यूजीसी के नए कानून और शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित पिटाई को कारण बताया था।
पांच पन्नों के पत्र में दर्ज किए थे गंभीर आरोप
इस्तीफे के साथ उन्होंने पांच पन्नों का विस्तृत पत्र भी लिखा था, जिसमें शासन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए थे।
डीएम आवास में रोके जाने का आरोप
इस्तीफे के बाद शाम करीब साढ़े सात बजे अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। बाहर आने पर उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगभग 45 मिनट तक डीएम आवास में रोके रखा गया और बाद में एसएसपी के कहने पर छोड़ा गया।
रात 11 बजे खाली किया सरकारी आवास
घटना के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने रात करीब 11 बजे अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया। हालांकि, उन्होंने बरेली नहीं छोड़ा है।
बरेली में ही ठहरे, परिचित के यहां लिया आसरा
सरकारी आवास छोड़ने के बाद वे बरेली में ही अपने एक परिचित के यहां रुके हुए हैं और फिलहाल वहीं से आगे की रणनीति तय कर रहे हैं।
शंकराचार्य बोले: अत्याचारी सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे अधिकारी
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट का मानना है कि जिस सरकार पर अत्याचार के आरोप हों, उसका हिस्सा बने रहना भी पाप के समान है, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
सनातन धर्म के प्रति आस्था का प्रतीक बताया इस्तीफा
शंकराचार्य ने कहा कि ऐसे पद को पाने के लिए लोग वर्षों मेहनत करते हैं, लेकिन अपने गुरु और सनातन धर्म के सम्मान के लिए अलंकार अग्निहोत्री ने सब कुछ त्याग दिया।
ब्राह्मण विरोधी अभियान का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण समाज के खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है और उन्हें अलग-अलग स्तरों पर प्रताड़ित किया जा रहा है।
आगे की रणनीति पर बोले सिटी मजिस्ट्रेट
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे फिलहाल बरेली में ही रहेंगे और अपने परिचितों के साथ बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
शंकराचार्य की सरकार को चेतावनी
अंत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्य के सम्मान को ठेस पहुंचाने का क्या परिणाम हो सकता है, इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।










