
Basij fielded in Iran, ईरान की सड़कों पर लगातार बढ़ रहे विरोध-प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार ने बासिज नामक अर्द्धसैनिक संगठन को सक्रिय कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। बासिज को ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का सबसे सख्त चेहरा माना जाता है।
खामेनेई का सख्त संदेश, प्रदर्शनों को बताया विदेशी साजिश
शुक्रवार 9 जनवरी को जुमे की नमाज़ के बाद देश को संबोधित करते हुए अयातुल्लाह खामेनेई ने विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और पश्चिमी देशों का हाथ बताया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इसके बाद संसद की सिफारिश पर बासिज बल को सड़कों पर उतारने का फैसला लिया गया।
बासिज का अर्थ और गठन की कहानी
बासिज एक फ़ारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है “लामबंदी”। इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद की गई थी। तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खुमैनी का मानना था कि यह संगठन ईरान को आंतरिक विद्रोह और विदेशी हस्तक्षेप से बचाने की ताकत बनेगा।
कैसे काम करता है बासिज संगठन
बासिज एक स्वयंसेवी अर्द्धसैनिक समूह है, जिसमें अधिकतर ग्रामीण और धार्मिक रूप से रूढ़िवादी पृष्ठभूमि के लोग शामिल होते हैं। स्थानीय स्तर पर यह संगठन मस्जिदों और मोहल्ला इकाइयों के ज़रिए लोगों पर निगरानी रखता है और सरकार विरोधी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधीन है बासिज
रणनीतिक रूप से बासिज, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नियंत्रण में काम करता है। अलग-अलग आकलनों के अनुसार, इस संगठन से जुड़े सदस्यों की संख्या करोड़ों में बताई जाती है। 2009 और 2022 के बड़े विरोध-प्रदर्शनों को दबाने में भी बासिज की अहम भूमिका रही थी।
अमेरिका की नजर में क्यों खतरनाक है बासिज
अमेरिका ने बासिज बल और उसके कई वरिष्ठ कमांडरों पर प्रतिबंध लगा रखा है। अमेरिकी प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यह संगठन असहमति की आवाज़ों को कुचलने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग करता है।
महंगाई से भड़का विरोध, सरकार के खिलाफ गुस्सा
ईरान में 27 दिसंबर 2025 से महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक संकट को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने माना कि आम लोगों की कई मांगें जायज़ हैं, लेकिन उनका कहना है कि कुछ हिंसक तत्वों ने आंदोलनों को भटका दिया।
दमन पर सवाल, सैकड़ों मौतों का दावा
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के संगठन HRANA के अनुसार, प्रदर्शनों को दबाने के दौरान 500 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया, ट्रंप का कड़ा बयान
ईरान में हो रही घटनाओं पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कथित अत्याचार जारी रहे तो अमेरिका कठोर कदम उठाने पर विचार कर सकता है।
आंतरिक संकट या अंतरराष्ट्रीय टकराव की भूमिका
ईरान में जारी संकट अब सिर्फ आंतरिक विरोध तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और मानवाधिकार बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। बासिज की तैनाती साफ संकेत देती है कि सरकार किसी भी कीमत पर हालात पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।









