
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला में अजय नदी के किनारे से बरामद द्वितीय विश्व युद्ध काल का मोर्टार बम आखिरकार भारतीय सेना ने निष्क्रिय कर दिया। करीब पांच महीने की निगरानी और सुरक्षा जांच के बाद शुक्रवार (13 फरवरी) को सेना की विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षित तरीके से बम को डिफ्यूज किया।
24 अक्टूबर 2025 को मिला था संदिग्ध बम
24 अक्टूबर 2025 को स्थानीय लोगों ने सिंगी पंचायत के तहत लाउदा गांव से होकर बहने वाली अजय नदी के किनारे एक संदिग्ध वस्तु देखी। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया। प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों ने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के समय का मोर्टार बम बताया।
सेना की विशेष टीम ने किया निष्क्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की आठ सदस्यीय बम निरोधक टीम मौके पर पहुंची। भारतीय सेना ने बोलपुर पुलिस स्टेशन के सहयोग से सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए और नियंत्रित विस्फोट के जरिए बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।
विस्फोट की आवाज से दहशत
नियंत्रित विस्फोट की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आवाज बिजली कड़कने जैसी थी, जिससे खिड़कियां हिल गईं और आसपास के गांवों में कंपन महसूस हुआ। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ।
पहले भी मिल चुके हैं मोर्टार बम
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बोलपुर क्षेत्र में अजय नदी के रेतीले तल से द्वितीय विश्व युद्ध काल के मोर्टार बम बरामद हो चुके हैं, जिन्हें बाद में सेना के बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया था।








