
इजरायल में स्थित इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र जगह अल-अक्सा मस्जिद इस बार ईद-उल-फितर पर पूरी तरह बंद रही। 1967 के छह दिवसीय युद्ध के बाद से यह पहली बार है जब अल-अक्सा परिसर को रमजान के आखिरी दिनों और ईद के मौके पर मुसलमानों के लिए बंद कर दिया गया। इजरायली अधिकारियों ने इसे ईरान के साथ चल रहे युद्ध से जुड़ी “सुरक्षा वजहों” से जोड़ा है।
अल-अक्सा मस्जिद बंद: 1967 के बाद पहली बार ईद पर ऐसा हुआ
इजरायल ने फरवरी 2026 के अंत में ईरान पर हमलों की शुरुआत के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर को ज्यादातर मुसलमानों के लिए सील कर दिया था। केवल वक्फ स्टाफ को सीमित संख्या में एंट्री दी गई। ईद-उल-फितर के दिन भी गेट बंद रहे, जिससे हजारों फिलिस्तीनी नमाजी ओल्ड सिटी के गेट्स के बाहर सड़कों पर ही नमाज अदा करने को मजबूर हुए।
एक 60 वर्षीय फिलिस्तीनी वाजदी मोहम्मद श्वेइकी ने मीडिया से कहा, “आज अल-अक्सा हमसे छीन ली गई है। यह हमारे लिए बहुत दुखद और दर्दनाक रमजान और ईद है।” ओल्ड सिटी की सड़कें सुनसान रहीं, ज्यादातर दुकानें बंद रहीं और केवल फार्मेसी व जरूरी सामान की दुकानें खुलीं। कुछ इलाकों में इजरायली सुरक्षा बलों ने नमाजियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज भी किया।
यह कदम 1967 में पूर्वी यरूशलम पर इजरायल के कब्जे के बाद पहली बार देखा गया है, जब रमजान के आखिरी 10 दिन और ईद पर अल-अक्सा पूरी तरह बंद रहा।
ईरान में ईद का माहौल: बाजार सूने, उत्सव फीके
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच तेहरान और अन्य शहरों में ईद का जश्न फीका रहा। बाजारों में रौनक नहीं थी, शॉपिंग और पारंपरिक ईद बाजार लगभग बंद रहे। ईरानी मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लगातार मिसाइल हमलों और हवाई हमलों की आशंका के कारण लोग घरों में ही रहकर ईद मनाने को मजबूर हुए। कई इलाकों में ईद की नमाज मस्जिदों में सीमित संख्या में हुई, जबकि सड़कों पर जश्न और मिलन की रौनक गायब थी।
UAE, कतर और कुवैत में खुले मैदानों में ईद नमाज पर रोक
खाड़ी देशों में भी युद्ध के असर दिखे। सुरक्षा कारणों से UAE, कतर और कुवैत ने ईद-उल-फितर की नमाज खुले मैदानों (ईदगाहों) में पढ़ने पर रोक लगा दी। इन देशों की सरकारों ने निर्देश जारी किए कि ईद की नमाज केवल मस्जिदों के अंदर ही अदा की जाएगी।
- UAE की जनरल अथॉरिटी ऑफ इस्लामिक अफेयर्स ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि खुले मैदानों में नमाज नहीं होगी, ताकि लोग सुरक्षित रहें।
- इसी तरह कतर और कुवैत में भी खुले में सामूहिक नमाज पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नियम तोड़ने पर जुर्माना लग सकता है।
यह फैसला ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच लिया गया, जहां मिसाइल हमलों की आशंका से बड़े आयोजन रद्द या सीमित किए गए।
युद्ध का व्यापक असर: मुस्लिम दुनिया में उदासी की लहर
ईरान के साथ युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट में ईद के उत्सव को प्रभावित किया है। यरूशलम की ओल्ड सिटी से लेकर तेहरान के बाजारों और दुबई के मैदानों तक, जहां हर साल रंग-बिरंगे जश्न होते थे, वहां इस बार सन्नाटा छाया रहा। मुस्लिम समुदाय में इसे “दुखद ईद” के रूप में याद किया जा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मुस्लिम देशों ने अल-अक्सा बंदी की निंदा की है, जबकि इजरायल इसे अस्थायी सुरक्षा उपाय बता रहा है।









