
क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि भारत का सबसे भव्य AI समिट, जहाँ सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे ग्लोबल जायंट्स पहुँचे, वहीँ चोरी की घटनाएँ हो गईं, लंबी-लंबी कतारें लगीं, पानी तक न मिला और पूरा इवेंट VIP मूवमेंट की भेंट चढ़ गया? क्या ये वो ‘डिजिटल इंडिया’ है जिसका ढिंढोरा पीटा जा रहा है – जहाँ हाई-सिक्योरिटी जोन में स्टार्टअप्स के पेटेंटेड प्रोडक्ट्स गायब हो जाएँ और सरकार बाद में माफी माँग ले? और सबसे बड़ा सवाल – क्या पीएम मोदी की विजिट ने स्टार्टअप्स को मौका दिया या सिर्फ फोटो ऑप और रील्स का सेट बना दिया? आज हम इसी AI इम्पैक्ट समिट 2026 की काली सच्चाई को खोलेंगे, तीखे सवालों के साथ, क्योंकि ये सिर्फ एक इवेंट की बात नहीं, भारत की AI महत्वाकांक्षा पर करारा सवाल है!
बता दें कि दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी को शुरू हुआ ये पाँच दिवसीय महासम्मेलन, जहाँ 100 से ज्यादा देशों के लीडर्स, 600 स्टार्टअप्स और 2.5 लाख डेलिगेट्स के आने की उम्मीद थी। लेकिन पहले दिन ही क्या हुआ? नियो-सैपियन स्टार्टअप के CEO धनंजय यादव के पेटेंटेड AI वियरेबल्स चोरी हो गए! दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक पीएम विजिट के नाम पर सिक्योरिटी लॉकडाउन रहा, प्रदर्शकों को बूथ छोड़ने का आदेश दे दिए गया – उन्हें ‘सामान सुरक्षित रहेगा’ का आश्वासन भी दिया गया था लेकिन लॉकडाउन खुला तो वियरेबल्स गायब मिले! धनंजय ने X पर चिल्ला-चिल्ला कर कहा – फ्लाइट, होटल, बूथ फीस के लाखों रुपये डूब गए और प्रोडक्ट चोरी हो गया। अब सवाल ये कि हाई-सिक्योरिटी जोन में चोरी कैसे? क्या सिक्योरिटी पर्सनल ही लापरवाह थे, या ये सुनियोजित लूट थी? और सरकार चुप, सिर्फ बाद में IT मंत्री अश्विनी वैष्णव प्रेस कॉन्फ्रेंस में माफी माँगते नजर आए – ‘अगर तकलीफ हुई तो माफी, आगे सुधारेंगे।’ लेकिन क्या माफी से चोरी का प्रोडक्ट तो वापस आ जाएगा ? ऐसे इवेंट्स में VIP विजिट से पहले स्टार्टअप्स को हटाना चाहिए या ये उनकी मेहनत पर पानी फेरने का तरीका है?
चलिए, अब दूसरी अव्यवस्था का हाल बताते हैं। सुबह 7 बजे से प्रदर्शक लाइन में लगे थे, लेकिन दोपहर 12 बजे पूरा हॉल खाली – पुनीत जैन जैसे उद्यमी घंटों बाहर फँसे रहे। गेट्स अचानक बंद हो गए, हजारों लोग बाहर रह गए। पानी की बोतलें बैन थीं, फूड काउंटर्स कैश-ओनली पर चल रहे थे यानी कि इतने बड़े एआई समिट में – UPI नहीं चले !, ‘भीड़ इतनी कि महिलाओं का चलना मुश्किल, AI शोकेस की जगह ये पूरा मार्केटेड इवेंट लग रहा।’ अब तो लोग तंज कस रहे हैं कि – ‘AI को समिट मैनेज करने के लिए यूज करना चाहिए था!’ अब बात कर लेते हैं नेटवर्क की? जी हां वाई-फाई नाम का कुछ था ही नहीं यहां पर, डेमो फेल, रजिस्ट्रेशन क्रैश। अनुराग ने X पर लिखा – ‘AI समिट में वाई-फाई नहीं? 3 घंटे कतारें, फाउंडर्स के प्रोडक्ट्स चोरी – डिजिटल इंडिया का फ्लैगशिप?’
लोग इसे 27 देशों के सामने ‘शर्मनाक’ कह रहे हैं क्योंकि एआई समिट में – लैपटॉप बैन था दोस्तों… पानी बैन! वीना जैन ने ओवरक्राउडिंग का वीडियो शेयर किया। सवाल खड़ा होता है – 2.5 लाख लोगों के लिए तैयारियाँ क्यों नाकाफी? QR कोड फेल, डिजी यात्रा इंटीग्रेशन गड़बड़ – ये AI समिट था या मैनेजमेंट का फेल्योर शो? कांग्रेस ने तो इसे ‘मोदी का फोटो समिट’ करार दे दिया! मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ‘पीआर भूखी सरकार ने वैश्विक शर्मिंदगी कराई। फाउंडर्स को तकलीफ, प्रोडक्ट चोरी, कैश-ओनली – बेंगलुरु टेक समिट से सीखो!’ YuVerse के रोमिल रुंगटा का इंटरव्यू शेयर कर बोले – ‘एग्जिबिटर्स को निकाल दिया, भोजन-पानी नहीं, जेल जैसे महसूस हुए।’
अब सवाल यह उठता है कि क्या ये अराजकता PM विजिट की वजह से थी, या आयोजकों की नाकामी?, ये घटनाएँ स्टार्टअप कम्युनिटी में आग लगा रही हैं। इवेंट की रिपोर्टस को देखकर लगता है ‘दिखावा ज्यादा, व्यवस्था शून्य!’ इंटरनेट खराब से डेमो फेल, कार-बाइक चाबियाँ अंदर नहीं, कोई क्लियर कम्युनिकेशन नहीं। एक तरफ अल्फाबेट, ओपनAI जैसे दिग्गज, दूसरी तरफ चोरी और अव्यवस्था – भारत की AI ताकत पर ये करारा थप्पड़ है! सवाल ये कि क्या सरकार बड़े इवेंट्स में सुरक्षा और सुविधा का बैलेंस रख पाएगी? या हर बार VIP प्रायोरिटी से स्टार्टअप्स ठगे जाएँगे? आयोजकों ने सुधार का वादा किया, लेकिन भरोसा कब बनेगा? ये समिट भारत को AI हब बनाने का था, लेकिन मिसमैनेजमेंट ने साबित कर दिया – बातें बड़ीं, अमल छोटा! दोस्तों, ये थी AI इम्पैक्ट समिट 2026 की काली हकीकत – चोरी, कतारें, कमी। क्या ये डिजिटल इंडिया का असली चेहरा है?









