Top Headlines

जनवरी में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 1.81% पर पहुंची, 10 महीनों का उच्च स्तर

Wholesale inflation (WPI) rose to 1.81% in January, a 10-month high.
Wholesale inflation (WPI) rose to 1.81% in January, a 10-month high.


Wholesale inflation (WPI) rose to 1.81% in January, a 10-month high., जनवरी 2026 में भारत की थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index – WPI) बढ़कर 1.81% हो गई है, जो दिसंबर 2025 में 0.83% थी। यह पिछले 10 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले मार्च 2025 में थोक महंगाई 2.05% दर्ज की गई थी।

ये आंकड़े 16 फरवरी को Ministry of Commerce and Industry द्वारा जारी किए गए हैं। रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे हैं।

रोजमर्रा के सामान और खाद्य वस्तुओं में तेजी

जनवरी में महंगाई के विभिन्न सेक्टर्स में बदलाव इस प्रकार रहे:

  • प्राइमरी आर्टिकल्स (दैनिक जरूरत की वस्तुएं): महंगाई दर 0.21% से बढ़कर 2.21% हो गई।
  • फूड इंडेक्स (खाने-पीने की चीजें): -0.43% से बढ़कर 1.55% हो गया।
  • फ्यूल और पावर: महंगाई दर -2.31% से घटकर -4.01% रही।
  • मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स: 1.82% से बढ़कर 2.86% हो गई।

WPI के मुख्य घटक और उनका वेटेज

थोक महंगाई को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा जाता है:

  • प्राइमरी आर्टिकल्स – 22.62% वेटेज
  • फ्यूल एंड पावर – 13.15% वेटेज
  • मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स – 64.23% वेटेज (सबसे अधिक)

प्राइमरी आर्टिकल्स के भी चार हिस्से होते हैं:

  • फूड आर्टिकल्स (अनाज, गेहूं, सब्जियां आदि)
  • नॉन-फूड आर्टिकल्स (ऑयल सीड्स आदि)
  • मिनरल्स
  • क्रूड पेट्रोलियम

रिटेल महंगाई भी 8 महीनों के उच्च स्तर पर

जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation/CPI) भी बढ़कर 2.75% हो गई, जो दिसंबर 2025 में 1.33% थी। यह पिछले 8 महीनों का सबसे ज्यादा स्तर है। इससे पहले मई 2025 में रिटेल महंगाई 2.82% रही थी।

आम लोगों पर थोक महंगाई का प्रभाव

अगर लंबे समय तक थोक महंगाई बढ़ी रहती है, तो इसका असर उत्पादन क्षेत्र और उद्योगों पर पड़ता है। कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे बाजार में वस्तुएं महंगी हो जाती हैं।

सरकार टैक्स और नीतिगत उपायों के जरिए WPI को नियंत्रित करने की कोशिश करती है। उदाहरण के तौर पर, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाई जाती है, लेकिन टैक्स में कटौती की भी एक सीमा होती है।

थोक महंगाई में मेटल, केमिकल, प्लास्टिक और रबर जैसे औद्योगिक उत्पादों का अधिक प्रभाव रहता है।

भारत में महंगाई कैसे मापी जाती है?

भारत में महंगाई मापने के दो प्रमुख तरीके हैं:

1. रिटेल महंगाई (CPI – Consumer Price Index)

  • आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित
  • इसमें फूड और प्रोडक्ट्स का वेटेज 45.86%, हाउसिंग 10.07% और अन्य श्रेणियां शामिल होती हैं

2. थोक महंगाई (WPI – Wholesale Price Index)

  • थोक बाजार में व्यापारियों के बीच होने वाले लेन-देन की कीमतों पर आधारित
  • इसमें मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (63.75%), प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%) और फ्यूल एंड पावर (13.15%) शामिल होते हैं

HIndustan Uday News

Writer & Blogger

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • All Posts
  • Business
  • Comparison
  • Dharma Darshan
  • Education
  • Entertainment
  • Food
  • Health & Fitness
  • Horoscope & Bhakti
  • International
  • Job
  • Lifestyle
  • News
  • Sports
  • Technology
  • World News
HINDUSTAN UDAY NEWS

Hindustan Uday News एक विश्वसनीय हिंदी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो राजनीति, देश-दुनिया, खेल, व्यवसाय और लाइफस्टाइल सहित सभी प्रमुख विषयों पर सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा खबरें पाठकों तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।

  • #latest news in hindi
  • #breaking news in hindi

©2026 Created with Hindustan Uday Digital