
Ajit Pawar was cremated with full state honours, बारामती आज उस पल की गवाह बनी, जब लाखों नम आंखों के सामने महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े नेता और उप मुख्यमंत्री अजित पवार पंचतत्व में विलीन हो गए। राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में उनके दोनों बेटों पार्थ पवार और जय पवार ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। पूरे मैदान में ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारे गूंजते रहे और हर चेहरा भावुक नजर आया। बारामती से लेकर पूरे महाराष्ट्र तक शोक की लहर है। लोगों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे अजित पवार अब उनके बीच नहीं रहे।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
अजित पवार के पार्थिव शरीर को पहले उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी लाया गया, जहां परिवार और करीबी लोगों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद अंतिम यात्रा बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान के लिए रवाना हुई। करीब छह किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में सड़क के दोनों ओर हजारों लोग खड़े दिखाई दिए। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई लोग पेड़ों और इमारतों पर चढ़कर अपने नेता की अंतिम झलक पाने की कोशिश करते नजर आए। कड़ी धूप के बावजूद लोग घंटों तक खड़े रहे। कई जगहों पर लोग रोते हुए दिखाई दिए।
पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
विद्या प्रतिष्ठान मैदान में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया था और पुलिस बल ने अंतिम सलामी दी। करीब दोपहर 12 बजे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई, जब उनके बेटों पार्थ और जय पवार ने मिलकर पिता की चिता को अग्नि दी। इस दौरान मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।
परिवार के लिए बेहद भावुक पल
अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी सुनेत्रा पवार बेहद भावुक नजर आईं। उन्हें परिवार के सदस्य संभालते हुए मंच तक लाए। पवार परिवार के अन्य सदस्य भी इस दौरान मौजूद रहे। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों के नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
अंतिम विदाई में जुटे देशभर के नेता
अजित पवार को अंतिम विदाई देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राज ठाकरे, रामदास आठवले, राहुल नार्वेकर सहित कई बड़े नेता पहुंचे। सभी नेताओं ने अजित पवार को एक जननेता और मजबूत प्रशासक बताया।
LED स्क्रीन से लोगों ने देखी अंतिम यात्रा
बारामती शहर के प्रमुख चौकों पर LED स्क्रीन लगाई गई थीं, ताकि जो लोग अंतिम संस्कार स्थल तक नहीं पहुंच सके, वे भी अपने नेता को अंतिम विदाई दे सकें। हर चौक पर भीड़ खड़ी रही और लोग नम आंखों से कार्यक्रम देखते रहे।
जनप्रिय थे अजित पवार?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अजित पवार ने बारामती और आसपास के इलाकों के विकास में अहम भूमिका निभाई। शिक्षा, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में उनके प्रयासों को लोग आज भी याद करते हैं। लोग बताते हैं कि वे सुबह जल्दी काम शुरू करते थे और जनता की समस्याओं को तुरंत सुनते थे। यही कारण रहा कि अंतिम यात्रा में इतनी बड़ी भीड़ उमड़ी।
नेताओं ने जताया गहरा दुख
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने एक करीबी मित्र खो दिया है। शरद पवार ने इसे बेहद दुखद घटना बताया और इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील की। देशभर के नेताओं ने अजित पवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
अब यादों में रहेंगे ‘अजित दादा’
बारामती में लोग उन्हें प्यार से ‘अजित दादा’ और ‘बारामती का राजा’ कहते थे। आज वही नेता पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन जनता के दिलों में उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
प्लेन क्रैश ने छीन लिया महाराष्ट्र का बड़ा नेता
बुधवार को बारामती के पास एक चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें अजित पवार समेत विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि विमान आग के गोले में बदल गया। घटना के बाद जांच एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मलबे की जांच शुरू की गई। DGCA की टीम ने ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है। इस हादसे में पायलट कैप्टन सुमित कपूर और कैप्टन शांभवी पाठक सहित अन्य लोगों की भी जान चली गई।
अजित पवार का जाना सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की जनता के लिए एक भावनात्मक क्षण है। आने वाले समय में उनके कार्य और राजनीतिक विरासत को लंबे समय तक याद किया जाएगा।









