
Congress poster in support of Shankaracharya Avimukteshwarananda, प्रयागराज माघ मेला 2025 में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार और शंकराचार्य के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। अब इस मामले ने पोस्टर वॉर का रूप भी ले लिया है।
कांग्रेस मुख्यालय में लगा विवादित पोस्टर
भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अयोध्या विधानसभा से जुड़े नेता शरद शुक्ला ने लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर एक पोस्टर लगाया।
पोस्टर में प्रयागराज कुंभ के दौरान कथित रूप से छोटे ब्राह्मणों की शिखा खींचे जाने की तस्वीर दिखाई गई है।
पोस्टर में श्रीरामचरितमानस की चौपाई —
“जाको प्रभु दारुण दुख देही, ताकी मति पहले हर लेही”
का उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस की ओर से इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला मामला बताया गया है।
प्रयागराज माघ मेला विवाद क्या है?
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस समय माघ मेले का आयोजन चल रहा है।
मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद सामने आया।
प्रशासन ने पालकी के माध्यम से गंगा स्नान करने से रोक दिया और कहा कि
“किसी को भी पालकी से स्नान की अनुमति नहीं है, सभी को पैदल स्नान करना होगा।”
इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विरोध के दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।
धरने के बाद बढ़ी सियासत, सरकार पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 6 दिनों से माघ मेला क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं।
धरने के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री की ओर से भी बयान सामने आए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से शंकराचार्य होने को लेकर सवाल उठाए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
शंकराचार्य के समर्थन में सपा और कांग्रेस
इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस खुलकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतर आई हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रयागराज माघ मेला विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है और क्या इसका कोई समाधान निकल पाता है।









