
UTB pulls out of BMC mayor election, मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर पद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। महायुति में शामिल भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच मेयर की कुर्सी को लेकर खुला घमासान मच गया है। चुनाव नतीजों में भाजपा के 89 और शिंदे गुट के 29 पार्षद जीतकर आए हैं।
संख्या के लिहाज़ से महायुति को बहुमत हासिल है, लेकिन सवाल एक ही है— मुंबई का मेयर किसका होगा? इस सियासी संग्राम के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान सामने आया है। उद्धव ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर बीएमसी में भाजपा का मेयर चुना गया, तो शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद मतदान प्रक्रिया से दूर रहेंगे। इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में गेम-चेंजर माना जा रहा है।
सत्ता-लोलुप दल अपनी लड़ाई खुद लड़ें
उद्धव ठाकरे के बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या शिवसेना (यूबीटी) भाजपा को बैकडोर से मदद करने जा रही है। लेकिन इसी बीच UBT के प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभालते हुए पार्टी का रुख बिल्कुल साफ कर दिया।
हर्षल प्रधान ने ट्वीट कर कहा— “सत्ता की लालच में साथ आई भाजपा और शिंदे सेना आपस में लड़ें, हमें इस गंदे सत्ता संघर्ष में मत घसीटें। समान विचारधारा वाले, सत्ता-लोलुप दल अपनी लड़ाई खुद लड़ें।” दरअसल, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिंदे गुट के बिना बीएमसी में सत्ता बनाने की स्थिति में नहीं है।
इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए एकनाथ शिंदे ने मेयर पद पर ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला सामने रख दिया है— पहले ढाई साल भाजपा का मेयर, फिर ढाई साल शिंदे गुट का।
हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
सत्ता की इस रस्साकशी के बीच हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका भी गहराती जा रही है। इसी डर से नवनिर्वाचित पार्षदों को फाइव-स्टार होटलों में ठहराया गया है, ताकि कोई टूट-फूट न हो।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की ओर से ठाकरे गुट से संपर्क की खबरें भी सामने आई थीं और दावा किया जा रहा था कि UBT के पार्षद मेयर चुनाव के दौरान अनुपस्थित रह सकते हैं। हालांकि भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच किसी भी बातचीत से इनकार किया है।
अब सवाल यही है क्या महायुति में अंदरूनी लड़ाई BJP की जीत को मुश्किल बना देगी? या फिर मुंबई की सत्ता एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखेगी? मुंबई के मेयर की कुर्सी अब सिर्फ पद नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता-राजनीति का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बन चुकी है।









