
Notice to the Central Government and the Election Commission , कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यों से जुड़े मामलों में आजीवन नागरिक और आपराधिक कार्रवाई से छूट देने का प्रावधान किया गया है। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस कानून के संवैधानिक पहलुओं की गहराई से जांच करना चाहती है।
याचिका में क्या कहा गया है?
जया ठाकुर की याचिका में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के मुताबिक— नया कानून चुनाव आयोग के सदस्यों को उनके फैसलों और कार्यों के लिए पूरी जिंदगी कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देता है। संविधान निर्माताओं ने इतनी व्यापक सुरक्षा न्यायाधीशों को भी नहीं दी थी। ऐसे में संसद किसी संवैधानिक पद को ऐसा संरक्षण नहीं दे सकती, जो संविधान में अन्य उच्च पदों को प्राप्त नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान लोकतंत्र और जवाबदेही की भावना के खिलाफ है।
2023 का विवादित कानून क्या कहता है ?
दिसंबर 2023 में संसद से पारित कानून में एक अहम प्रावधान जोड़ा गया, जिसके अनुसार—“यदि चुनाव कराते समय या उससे जुड़े किसी निर्णय में कोई गलती, विवाद या आरोप लगता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों पर व्यक्तिगत रूप से कोई मुकदमा नहीं किया जा सकेगा। यह सुरक्षा उनके पूरे जीवन तक लागू रहेगी, भले ही वे पद पर न हों।” इसी प्रावधान को जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
पूरा घटनाक्रम: तारीखों में समझिए मामला
2 मार्च 2023: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला कोर्ट ने कहा कि CEC और EC की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति बनेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होंगे। यह व्यवस्था तब तक लागू रहने की बात कही गई, जब तक संसद कोई कानून न बना दे।
21 दिसंबर 2023: नया कानून संसद से पास
केंद्र सरकार ने नया कानून पारित कराया, जिसमें चयन समिति में प्रधानमंत्री लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया और CJI को समिति से बाहर कर दिया गया। 15 मार्च 2024 ज्ञानेश कुमार और डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने चुनाव आयुक्त का पद संभाला। 19 फरवरी 2025 ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। 4 दिसंबर 2025 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट के 2023 के फैसले को कमजोर करने के लिए कानून लाई है। तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन?
याचिका में कहा गया है कि कानून की धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन करती हैं, क्योंकि— नियुक्ति प्रक्रिया में स्वतंत्र तंत्र (Independent Mechanism) नहीं है। यह कानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए लाया गया। केंद्र सरकार को फिर से एकतरफा नियंत्रण देने की कोशिश की गई है
चुनाव आयोग में कितने आयुक्त हो सकते हैं?
भारतीय संविधान चुनाव आयुक्तों की संख्या तय नहीं करता। अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त हो सकते हैं। उनकी संख्या तय करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है।
इतिहास पर एक नजर
आज़ादी के बाद लंबे समय तक चुनाव आयोग एक सदस्यीय था।
16 अक्टूबर 1989 : राजीव गांधी सरकार ने दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए।
2 जनवरी 1990 : वीपी सिंह सरकार ने आयोग को फिर एक सदस्यीय बना दिया।
1 अक्टूबर 1993: पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने अध्यादेश लाकर फिर दो चुनाव आयुक्त नियुक्त किए।
तब से लेकर आज तक चुनाव आयोग एक तीन-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर बहस
जया ठाकुर की याचिका ने एक बार फिर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं—क्या यह कानून संवैधानिक कसौटी पर खरा उतर पाएगा या नहीं।









