
Trump says PM Modi unhappy with 50% tariff, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुश नहीं हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ट्रम्प ने यह बात वॉशिंगटन में हाउस रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों के साथ हुई बैठक में कही। डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनसे मिलने आए थे। ट्रम्प के अनुसार, पीएम मोदी ने उनसे कहा था—“सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?” जिस पर उन्होंने सहमति दी। हालांकि ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि यह बातचीत कब और किस स्थान पर हुई थी।
अपाचे हेलिकॉप्टर डील का ज़िक्र
ट्रम्प ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से अपाचे हेलिकॉप्टर डील को लेकर उनके संपर्क में था। उन्होंने बताया कि भारत ने 68 अपाचे हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है और इस सौदे में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।
ट्रम्प बोले: मोदी से मेरे अच्छे रिश्ते हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं। ट्रम्प के अनुसार, भारत ने अब रूस से तेल खरीद को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे यह साफ होता है कि भारत अमेरिका की चिंताओं को समझ रहा है।
भारत पर 50% टैरिफ, रूस से तेल बना वजह
डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ शामिल है, जबकि बाकी 25% अतिरिक्त टैरिफ रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है।
ट्रम्प का बयान: मोदी मुझे खुश करना चाहते थे
ट्रम्प ने इससे एक दिन पहले भी बयान दिया था कि भारत ने रूस से तेल आयात कम करने का फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। उन्होंने कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए उन्होंने मुझे खुश करना जरूरी समझा।”
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस का सबसे बड़ा ग्राहक बना भारत
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप रहा है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से यूक्रेन पर हो रहे हमलों को आर्थिक मदद मिल रही है।
चार साल बाद भारत ने घटाया रूसी तेल आयात
भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात कम किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में भारत रूस से करीब 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात कर रहा था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।
जनवरी में और गिरावट की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक, जनवरी में जारी होने वाले आंकड़ों में रूस से तेल आयात में और बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। नवंबर 2021 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत का आयात लगातार कम हो रहा है।
रूस ने घटाई छूट, भारत को कम फायदा
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस 20–25 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता कच्चा तेल बेच रहा था। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल रह गई है और रूस ने छूट घटाकर 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है।
शिपिंग और बीमा लागत भी बनी बड़ी समस्या
रूस से तेल आयात में शिपिंग और बीमा की लागत ज्यादा होने के कारण भारत को अब पहले जैसा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। इसी वजह से भारत दोबारा सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स की ओर लौट रहा है।
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद सुलझाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से तेल खरीद पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ पूरी तरह हटाया जाए।
नए साल में फैसले की उम्मीद
दोनों देशों के बीच जारी वार्ता से उम्मीद की जा रही है कि नए साल में इस टैरिफ विवाद पर कोई ठोस और सकारात्मक फैसला सामने आ सकता है।









