
Rice par tariff ,रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन अभी हाल ही में भारत के दौरे पर आए थे । इस दौरे ने यह साबित कर दिया कि रूस और भारत के रिश्तों में कितनी प्रगाढ़ता है । दशकों का रिश्ता अभी भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था । लेकिन पुतिन का यह भारत दौरा किसी की आंखों में बुरी तरह खटक गया । वह कोई और नहीं वे हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप । हालात ऐसे हो गए हैं कि भारत पर फिर से नाराज हो गए हैं । और इसका कारण है भारत के रूसी तेल से लेकर चावल निर्यात तक । अब ट्रंप भारत के rice par tariff बढ़ानें की अटकलें लग रही हैं ।
अमेरिका की नाराज़गी: भारत पर 50% टैरिफ लागू
अमेरिका ने पहले ही भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इसके साथ ही पहले से मौजूद 25% शुल्क मिलाकर भारत पर कुल 50% अमेरिकी टैरिफ लागू हो चुका है — जो कि किसी भी देश पर सबसे अधिक माना जा रहा है। और अब ट्रंप का अगला निशाना है भारत का चावल निर्यात सेक्टर (India Rice Export)। rice par tariff बढ़ाया जा सकता है
rice par tariff को लेकर व्हाइट हाउस में कृषि उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत
व्हाइट हाउस में कृषि उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि भारत और थाईलैंड जैसे देश अमेरिकी बाजार में सस्ता चावल भेजकर मार्केट को बिगाड़ रहे हैं । इसी बैठक में ट्रंप ने सवाल पूछते हुए कहा: “भारत अमेरिकी बाजार में चावल सस्ते दामों पर क्यों बेच रहा है? इसे रोका जाएगा।” ट्रंप की यही बात मीडिया में आ गई और इसी बैठक के पश्चात rice par tariff की चर्चा होने लग गई
यही वह पल था जब वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में यह वाक्य उभरकर आया । इसी बैठक के बाद rice par tariff की बात चर्चा में आई
WTO में मामला और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी प्रतिनिधियों ने बताया कि भारत के खिलाफ पहले से ही एक WTO केस चल रहा है। इस पर ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा: “शुल्क बढ़ाकर यह समस्या एक दिन में हल हो जाएगी।” ट्रंप के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत के कृषि निर्यात पर कठोर व्यापारिक कार्रवाई (Trade Action) की संभावना यानी rice par tariff बढ़ सकता है ?
भारत: दुनिया का नंबर-1 Rice Exporter
Indian Rice Exports Federation के अनुसार:
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक है
ग्लोबल मार्केट में भारत का हिस्सा 28%
2024-25 में चावल निर्यात हिस्सेदारी 30.3%
भारत की लोकप्रिय चावल किस्में — सोना मसूरी और बासमती — अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और खाड़ी देशों में बड़ी मात्रा में बिकती हैं।
यही कारण है कि अमेरिकी किसान इसे सीधा आर्थिक खतरा मान रहे हैं — और यहीं से दोबारा यह स्थिति पैदा हुई है कि:
क्या यह Global Trade War की शुरुआत है?
पुतिन का भारत दौरा जहां भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाता दिखा, वहीं ट्रंप के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में:
India vs US Trade Tension
Rice Tariff Dispute
Russian Oil Pressure
Geopolitical Polarization
और बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
पुतिन का भारत दौरा सिर्फ डिप्लोमैसी नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक सिग्नल था। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की प्रतिक्रिया से साफ है कि: ट्रंप की भारत से नाराजगी और इसका असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। यह देखने वाली बात होगी ।









